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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 19th Oct 2023

    दिल्ली की तस्वीर!

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| स्वर्गीय रमेश रंजक जी मेरे अत्यंत प्रिय नवगीतकार रहे हैं, जब कविता लिखना प्रारंभ किया था तब मैं उनके नवगीत अक्सर गुनगुनाया करता था| रंजक जी के अनेक नवगीत मैंने पहले भी शेयर किए हैं और उनके बारे में…

  • 18th Oct 2023

    सूली न चढ़ाओ यारो!

    उम्र-भर क़त्ल हुआ हूँ मैं तुम्हारी ख़ातिर, आख़िरी वक़्त तो सूली न चढ़ाओ यारो| जाँ निसार अख़्तर

  • 16th Oct 2023

    नाज़ उठाओ यारो!

    ज़िंदगी यूँ तो न बाँहों में चली आएगी, ग़म-ए-दौराँ के ज़रा नाज़ उठाओ यारो| जाँ निसार अख़्तर

  • 16th Oct 2023

    कुछ हाथ बटाओ यारो!

    बोझ दुनिया का उठाऊँगा अकेला कब तक, हो सके तुम से तो कुछ हाथ बटाओ यारो| जाँ निसार अख़्तर

  • 16th Oct 2023

    आँखों में बसाओ यारो!

    एक भी ख़्वाब न हो जिनमें वो आँखें क्या हैं, इक न इक ख़्वाब तो आँखों में बसाओ यारो| जाँ निसार अख़्तर

  • 16th Oct 2023

    ख़ून-ए-दिल से कोई..

    इन अंधेरों से निकलने की कोई राह करो, ख़ून-ए-दिल से कोई मिशअल ही जलाओ यारो| जाँ निसार अख़्तर

  • 16th Oct 2023

    कुछ तो बताओ यारो!

    तुम पे क्या बीत गई कुछ तो बताओ यारो, मैं कोई ग़ैर नहीं हूँ कि छुपाओ यारो| जाँ निसार अख़्तर

  • 16th Oct 2023

    प्रत्यावर्तन!

    आज एक बार फिर मैं देश के एक श्रेष्ठ कवि और वरिष्ठ नवगीतकार श्री बुदधिनाथ मिश्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| श्री मिश्र जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुदधिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत – सिर्फ़ सोने से सजाई देह मैंने…

  • 15th Oct 2023

    मैं चंद ख़्वाब…

    पता नहीं कि मिरे बाद उन पे क्या गुज़री, मैं चंद ख़्वाब ज़माने में छोड़ आया था| जाँ निसार अख़्तर

  • 15th Oct 2023

    तूने बदन चुराया था!

    शगुफ़्ता फूल सिमटकर कली बने जैसे, कुछ इस कमाल से तूने बदन चुराया था| जाँ निसार अख़्तर

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