सूली न चढ़ाओ यारो!

उम्र-भर क़त्ल हुआ हूँ मैं तुम्हारी ख़ातिर,

आख़िरी वक़्त तो सूली न चढ़ाओ यारो|

जाँ निसार अख़्तर

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