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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 17th Apr 2023

    बहुत बुलंद उड़ा!

    अकेला पत्ता हवा में बहुत बुलंद उड़ा, ज़मीं से पाँव उठाओ हवाएँ भेजी हैं| गुलज़ार

  • 17th Apr 2023

    हमने ख़ताएँ भेजी हैं!

    तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं, सज़ाएँ भेज दो हमने ख़ताएँ भेजी हैं| गुलज़ार

  • 17th Apr 2023

    चमकती हुई कनारी है!

    सियाह रंग चमकती हुई कनारी है, पहन लो अच्छी लगेंगी घटाएँ भेजी हैं| गुलज़ार

  • 17th Apr 2023

    तुमको रुलाएँ भेजी हैं

    तुम्हारी ख़ुश्क सी आँखें भली नहीं लगतीं, वो सारी चीज़ें जो तुमको रुलाएँ, भेजी हैं| गुलज़ार

  • 17th Apr 2023

    बहुत सी दुआएँ भेजी हैं

    गुलों को सुनना ज़रा तुम सदाएँ भेजी हैं, गुलों के हाथ बहुत सी दुआएँ भेजी हैं| गुलज़ार

  • 17th Apr 2023

    नवनिर्माण का संकल्प!

    आज एक फिर से मैं श्रेष्ठ गीतकार और देश में नवगीत आंदोलन के प्रमुख स्तंभ स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का यह गीत  – विषम भूमि नीचे, निठुर व्योम ऊपर! यहाँ राह अपनी बनाने चले हम,यहाँ प्यास अपनी बुझाने चले हम,जहाँ…

  • 16th Apr 2023

    बेताबियाँ, अंगड़ाइयाँ!

    क्या ज़माने में यूँ ही कटती है रात, करवटें, बेताबियाँ, अंगड़ाइयाँ| कैफ़ भोपाली

  • 16th Apr 2023

    मजबूरियाँ, तन्हाइयाँ!

      ज़िंदगी शायद इसी का नाम है, दूरियाँ, मजबूरियाँ, तन्हाइयाँ| कैफ़ भोपाली

  • 16th Apr 2023

    बस इक बूँद गिरा दी!

    हाए ये उनका तर्ज़-ए-मोहब्बत, आँख से बस इक बूँद गिरा दी|     कैफ़ भोपाली

  • 16th Apr 2023

    हमारी उम्र बढ़ा दी!

    आपने झूटा वा‘दा कर के, आज हमारी उम्र बढ़ा दी| कैफ़ भोपाली

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