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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 25th Apr 2023

    मेरा तेरा ख़ून बहा है!

    जब भी कोई तख़्त सजा है मेरा तेरा ख़ून बहा है, दरबारों की शान-ओ-शौकत मैदानों की शमशीरें हैं| निदा फ़ाज़ली

  • 25th Apr 2023

    चंद घरों में ताबीरें हैं!

    आज और कल की बात नहीं है सदियों की तारीख़ यही है, हर आँगन में ख़्वाब हैं लेकिन चंद घरों में ताबीरें हैं| निदा फ़ाज़ली

  • 25th Apr 2023

    एकसी लेकिन ज़ंजीरें हैं

    मुट्ठी भर लोगों के हाथों में लाखों की तक़दीरें हैं, जुदा जुदा हैं धर्म इलाक़े एक सी लेकिन ज़ंजीरें हैं| निदा फ़ाज़ली

  • 25th Apr 2023

    इन दिनों!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ साहित्यकार श्री रामदरश मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इस कविता में जिस समस्या का उल्लेख किया है, उसका सामना वरिष्ठ साहित्यकारों को खूब करना पड़ता है| मिश्र जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री…

  • 24th Apr 2023

    मोहलत कभी कभी!

    फिर खो न जाएँ हम कहीं दुनिया की भीड़ में, मिलती है पास आने की मोहलत कभी कभी| साहिर लुधियानवी

  • 24th Apr 2023

    तन्हा न कट सकेंगे!

    तन्हा न कट सकेंगे जवानी के रास्ते, पेश आएगी किसी की ज़रूरत कभी कभी| साहिर लुधियानवी

  • 24th Apr 2023

    ये क़यामत कभी कभी

    खुलते नहीं हैं रोज़ दरीचे बहार के, आती है जान-ए-मन ये क़यामत कभी कभी| साहिर लुधियानवी

  • 24th Apr 2023

    नज़र के सवाल पर!

    शरमा के मुँह न फेर नज़र के सवाल पर, लाती है ऐसे मोड़ पे क़िस्मत कभी कभी|

  • 24th Apr 2023

    इनायत कभी कभी!

    मिलती है ज़िंदगी में मोहब्बत कभी कभी, होती है दिलबरों की इनायत कभी कभी| साहिर लुधियानवी 

  • 24th Apr 2023

    निबाह रहा हो रक़ीब से

    इस तरह ज़िंदगी ने दिया है हमारा साथ, जैसे कोई निबाह रहा हो रक़ीब से| साहिर लुधियानवी

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