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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 31st Oct 2023

    कोई दूसरा धंदा करें!

    कीजिएगा रहज़नी कब तक ब-नाम-ए-रहबरी, अब से बेहतर आप कोई दूसरा धंदा करें| नज़ीर बनारसी

  • 31st Oct 2023

    घर का दरवाज़ा करें!

    सुन रहा हूँ कुछ लुटेरे आ गए हैं शहर में, आप जल्दी बंद अपने घर का दरवाज़ा करें| नज़ीर बनारसी

  • 31st Oct 2023

    दुनिया से हम पर्दा करें!

    जी में आता है कि दें पर्दे से पर्दे का जवाब, हम से वो पर्दा करें दुनिया से हम पर्दा करें| नज़ीर बनारसी

  • 31st Oct 2023

    बाज़ार तो ऊँचा करें!

    चढ़ के सूली पर ख़रीदेंगे ख़रीदार आपको, आप अपने हुस्न का बाज़ार तो ऊँचा करें| नज़ीर बनारसी

  • 31st Oct 2023

    हुस्न तो पैदा करें!

    हुस्न ख़ुद आए तवाफ़-ए-इश्क़ करने के लिए, इश्क़ वाले ज़िंदगी में हुस्न तो पैदा करें| नज़ीर बनारसी

  • 31st Oct 2023

    दरिया दूसरा पैदा करें!

    दूसरों से कब तलक हम प्यास का शिकवा करें, लाओ तेशा एक दरिया दूसरा पैदा करें| नज़ीर बनारसी

  • 31st Oct 2023

    ऐसा करें वैसा करें!

    ये करें और वो करें ऐसा करें वैसा करें, ज़िंदगी दो दिन की है दो दिन में हम क्या क्या करें| नज़ीर बनारसी

  • 31st Oct 2023

    साँसों का हिसाब!  

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय शिवमंगल सिंह सुमन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| स्वर्गीय सुमन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिवमंगल सिंह सुमन जी की यह कविता – तुम जो जीवित कहलाने के हो आदीतुम जिसको दफ़ना…

  • 30th Oct 2023

    न समझ सकें तो पानी!

    मिरी बे-ज़बान आँखों से गिरे हैं चंद क़तरे, वो समझ सकें तो आँसू न समझ सकें तो पानी| नज़ीर बनारसी

  • 30th Oct 2023

    सँवर गई जवानी!

    तिरा हुस्न सो रहा था मिरी छेड़ ने जगाया, वो निगाह मैंने डाली कि सँवर गई जवानी| नज़ीर बनारसी

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