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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 29th Oct 2023

    सुना रही है फ़साने!

    सबा* भी लाई न कोई पयाम अपनों का, सुना रही है फ़साने इधर उधर के मुझे| *पुरवाई मजरूह सुल्तानपुरी

  • 29th Oct 2023

    उदास कर के मुझे!

    किसी ने भी तो न देखा निगाह भर के मुझे, गया फिर आज का दिन भी उदास कर के मुझे| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 29th Oct 2023

    देश हैं हम!  

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी नवगीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| स्वर्गीय शंभुनाथ जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का यह नवगीत – देश हैं हम        महज राजधानी नहीं । हम नगर थे कभीखण्डहर…

  • 28th Oct 2023

    अबरू की कटारी!

    इस दिल में अभी और भी ज़ख़्मों की जगह है, अबरू* की कटारी को दो आब और ज़ियादा| *भौं हसरत जयपुरी  

  • 28th Oct 2023

    महफ़िल में सितमगर!

    क्या बात है जाने तिरी महफ़िल में सितमगर, धड़के है दिल-ए-ख़ाना-ख़राब और ज़ियादा| हसरत जयपुरी

  • 28th Oct 2023

    गुलाब और ज़ियादा!

    छलके तिरी आँखों से शराब और ज़ियादा, खिलते रहें होंठों के गुलाब और ज़ियादा| हसरत जयपुरी

  • 28th Oct 2023

    बुराई तो नहीं माँगी थी!

    अपने बीमार पे इतना भी सितम ठीक नहीं, तेरी उल्फ़त में बुराई तो नहीं माँगी थी| हसरत जयपुरी

  • 28th Oct 2023

    पराई तो नहीं माँगी!

    मेरा हक़ था तिरी आँखों की छलकती मय पर, चीज़ अपनी थी पराई तो नहीं माँगी थी| हसरत जयपुरी

  • 28th Oct 2023

    खुदाई तो नहीं माँगी थी

    मैंने क्या जुर्म किया आप ख़फ़ा हो बैठे, प्यार माँगा था खुदाई तो नहीं माँगी थी| हसरत जयपुरी  

  • 28th Oct 2023

    रिहाई तो नहीं माँगी थी

    तेरी ज़ुल्फ़ों से जुदाई तो नहीं माँगी थी, क़ैद माँगी थी रिहाई तो नहीं माँगी थी| हसरत जयपुरी

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