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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 16th Nov 2023

    धूम मचा दी उसने!

    महफ़िल-ए-शौक़ में इक धूम मचा दी उसने,ख़ल्वत-ए-दिल में रही अन्जुमन-आरा बन कर| अली सरदार जाफ़री

  • 16th Nov 2023

    रंग और नूर का!

    मेरी वादी में वो इक दिन यूँ ही आ निकली थी,रंग और नूर का बहता हुआ धारा बन कर| अली सरदार जाफ़री

  • 16th Nov 2023

    आदमी खोखले हैं!

    आज मैं प्रसिद्ध हिन्दी कवि और रूबाई सम्राट के नाम से विख्यात श्री उदयभानु हंस जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| हंस जी की कुछ सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री उदयभानु हंस जी की यह ग़ज़ल – आदमी खोखले हैं पूस के बादल की तरह,शहर…

  • 15th Nov 2023

    वफ़ा का नहीं होता!

    दिल तर्क-ए-तअ‘ल्लुक़ पे भी आमादा नहीं है, और हक़ भी अदा इससे वफ़ा का नहीं होता|      शहरयार

  • 15th Nov 2023

    देखा नहीं होता!

    या इतनी न तब्दील हुई होती ये दुनिया, या मैंने इसे ख़्वाब में देखा नहीं होता| शहरयार

  • 15th Nov 2023

    तिरा ख़याल भी!

    तिरा ख़याल भी तेरी तरह सितमगर है, जहाँ पे चाहिए आना वहीं नहीं आता| शहरयार

  • 13th Nov 2023

    सवेरा नहीं होता!

    क्यूँ मेरा मुक़द्दर है उजालों की सियाही, क्यूँ रात के ढलने पे सवेरा नहीं होता| शहरयार दीपावली की शुभकामनाएं, अगले दो दिन सोशल मीडिया- फेस बुक आदि से तो दूर रहूँगा|

  • 12th Nov 2023

    कभी ठहरा नहीं होता!

    इस मोड़ से आगे भी कोई मोड़ है वर्ना, यूँ मेरे लिए तू कभी ठहरा नहीं होता| शहरयार

  • 12th Nov 2023

    तन्हा नहीं होता!

    ये क्या है मोहब्बत में तो ऐसा नहीं होता, मैं तुझ से जुदा हो के भी तन्हा नहीं होता| शहरयार

  • 12th Nov 2023

    बिछड़ना है तो बिछड़

    बिछड़ना है तो बिछड़ जा इसी दो-राहे पर, कि मोड़ आगे सफ़र में कहीं नहीं आता| शहरयार

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