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धूम मचा दी उसने!
महफ़िल-ए-शौक़ में इक धूम मचा दी उसने,ख़ल्वत-ए-दिल में रही अन्जुमन-आरा बन कर| अली सरदार जाफ़री
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रंग और नूर का!
मेरी वादी में वो इक दिन यूँ ही आ निकली थी,रंग और नूर का बहता हुआ धारा बन कर| अली सरदार जाफ़री
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आदमी खोखले हैं!
आज मैं प्रसिद्ध हिन्दी कवि और रूबाई सम्राट के नाम से विख्यात श्री उदयभानु हंस जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| हंस जी की कुछ सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री उदयभानु हंस जी की यह ग़ज़ल – आदमी खोखले हैं पूस के बादल की तरह,शहर…
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वफ़ा का नहीं होता!
दिल तर्क-ए-तअ‘ल्लुक़ पे भी आमादा नहीं है, और हक़ भी अदा इससे वफ़ा का नहीं होता| शहरयार
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सवेरा नहीं होता!
क्यूँ मेरा मुक़द्दर है उजालों की सियाही, क्यूँ रात के ढलने पे सवेरा नहीं होता| शहरयार दीपावली की शुभकामनाएं, अगले दो दिन सोशल मीडिया- फेस बुक आदि से तो दूर रहूँगा|
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तन्हा नहीं होता!
ये क्या है मोहब्बत में तो ऐसा नहीं होता, मैं तुझ से जुदा हो के भी तन्हा नहीं होता| शहरयार
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बिछड़ना है तो बिछड़
बिछड़ना है तो बिछड़ जा इसी दो-राहे पर, कि मोड़ आगे सफ़र में कहीं नहीं आता| शहरयार