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मधुर-मधुर मेरे दीपक जल!
आज एक बार फिर मैं छायावाद युग की एक प्रमुख स्तंभ महादेवी वर्मा जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। महादेवी जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीया महादेवी वर्मा जी का यह गीत- मधुर-मधुर मेरे दीपक जल!युग-युग प्रतिदिन प्रतिक्षण प्रतिपलप्रियतम का पथ आलोकित कर! सौरभ…
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दास्ताँ से मिलता है!
सुना है लूट लिया है किसी को रहबर ने, ये वाक़िआ तो मिरी दास्ताँ से मिलता है| शमीम जयपुरी
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इसी ज़मीं से इसी !
इसी ज़मीं से इसी आसमाँ से मिलता है,ये कौन देता है आख़िर कहाँ से मिलता है| शमीम जयपुरी
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ज़मीं पे रह के दिमाग़ !
ज़मीं पे रह के दिमाग़ आसमाँ से मिलता है,कभी ये सर जो तिरे आस्ताँ से मिलता है| शमीम जयपुरी
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छत से कूदती महिला!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज फिर से मैं स्वर्गीय ओम प्रकाश आदित्य जी की एक हास्य कविता शेयर कर रहा हूँ, जिसमें उन्होंने छत से कूदने को तैयार लग रही एक महिला को लेकर विभिन्न प्रसिद्ध कवियों के अंदाज़ में प्रतिक्रियाएं प्रस्तुत की हैं। प्रस्तुत है आदित्य जी की यह प्रसिद्ध कविता मेरे…