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शामिल है मिरा ख़ून!
शामिल है मिरा ख़ून-ए-जिगर तेरी हिना में, ये कम हो तो अब ख़ून-ए-वफ़ा साथ लिए जा| साहिर लुधियानवी
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अश्कों की घटा!
तपती हुई राहों से तुझे आँच न पहुँचे, दीवानों के अश्कों की घटा साथ लिए जा| साहिर लुधियानवी
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साथ लिए जा!
इक दिल था जो पहले ही तुझे सौंप दिया था, ये जान भी ऐ जान-ए-अदा साथ लिए जा| साहिर लुधियानवी
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दुआ साथ लिए जा!
बरबाद-ए-मोहब्बत की दुआ साथ लिए जा, टूटा हुआ इक़रार-ए-वफ़ा साथ लिए जा| साहिर लुधियानवी
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अवशिष्ट!
आज एक बार मैं फिर से प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार और संपादक स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ| भारती जी ने साहित्य की प्रत्येक विधा में अपना अमूल्य योगदान किया था| भारती जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी का…
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दीदार की बातें करते हैं
उल्फ़त के नए दीवानों को किस तरह से कोई समझाए, नज़रों पे लगी है पाबंदी दीदार की बातें करते हैं| शकील बदायूनी
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प्यार की बातें करते हैं!
हर दिल में छुपा है तीर कोई हर पाँव में है ज़ंजीर कोई, पूछे कोई इन से ग़म के मज़े जो प्यार की बातें करते हैं| शकील बदायूनी
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ग़मों का इल्म नहीं!
ऐ इश्क़ ये सब दुनिया वाले बे-कार की बातें करते हैं, पायल के ग़मों का इल्म नहीं झंकार की बातें करते हैं| शकील बदायूनी
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तक़दीर पे रोना आया!
दिल गँवाकर भी मोहब्बत के मज़े मिल न सके, अपनी खोई हुई तक़दीर पे रोना आया| शकील बदायूनी