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खुलती हैं बहुत दिल में
बोझल नज़र आती हैं ब-ज़ाहिर मुझे लेकिन, खुलती हैं बहुत दिल में उतर कर तिरी आँखें| मोहसिन नक़वी
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अपनी गंध नहीं बेचूंगा!
आज मैं प्रसिद्ध हिन्दी कवि और राजनेता, स्वर्गीय बालकवि बैरागी जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| बैरागी जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बालकवि बैरागी जी की यह कविता – चाहे सभी सुमन बिक जाएंचाहे ये उपवन बिक जाएंचाहे सौ फागुन बिक जाएंपर मैं…
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गौहर तेरी आँखें!
ख़ाली जो हुई शाम-ए-ग़रीबाँ की हथेली, क्या क्या न लुटाती रहीं गौहर तेरी आँखें| मोहसिन नक़वी
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बिछड़कर तिरी आँखें!
फिर कौन भला दाद-ए-तबस्सुम उन्हें देगा, रोएँगी बहुत मुझ से बिछड़कर तिरी आँखें| मोहसिन नक़वी
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समुंदर तिरी आँखें!
भड़काएँ मिरी प्यास को अक्सर तिरी आँखें, सहरा मिरा चेहरा है समुंदर तिरी आँखें| मोहसिन नक़वी
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ग़लती हुई होगी!
आज मैं प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार और राजनेता तथा संसदीय राजभाषा समिति के सदस्य रहे श्री उदयप्रताप सिंह जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| श्री उदयप्रताप जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री उदयप्रताप सिंह जी की यह कविता – हमारे घर की दीवारों में अनगिनत…