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रंग-ओ-ख़ुशबू के
रंग-ओ-ख़ुशबू के हुस्न-ओ-ख़ूबी के, तुमसे थे जितने इस्तिआरे* थे| *उपमाएं फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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कुछ भी तो अब!
आज मैं श्रेष्ठ हिन्दी नवगीतकार स्वर्गीय नईम जी का एक नवगीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| उनकी कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नईम जी का यह नवगीत – कुछ भी तो अबतन्त नहीं है-ऊपरवाले की लाठी में। दीमक चाट गयी है शायद-ये भी ऊपरवाला जाने,भुस में तिनगी जिसने…
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शायरी तुझको गँवाया
क्या पता हो भी सके इस की तलाफ़ी कि नहीं, शायरी तुझको गँवाया है बहुत दिन हमने| जाँ निसार अख़्तर
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बहुत दिन हमने!
मुद्दतों तर्क-ए-तमन्ना पे लहू रोया है, इश्क़ का क़र्ज़ चुकाया है बहुत दिन हमने| जाँ निसार अख़्तर
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बहुत दिन हमने!
तुम भी इस दिल को दुखा लो तो कोई बात नहीं, अपना दिल आप दुखाया है बहुत दिन हमने| जाँ निसार अख़्तर
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अब ये नेकी भी हमें
अब ये नेकी भी हमें जुर्म नज़र आती है, सब के ऐबों को छुपाया है बहुत दिन हमने| जाँ निसार अख़्तर
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बहुत दिन हमने!
ज़िंदगी तुझ को भुलाया है बहुत दिन हमने, वक़्त ख़्वाबों में गँवाया है बहुत दिन हमने| जाँ निसार अख़्तर
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गुज़ारा ही न हो!
शर्म आती है कि उस शहर में हम हैं कि जहाँ, न मिले भीक तो लाखों का गुज़ारा ही न हो| जाँ निसार अख़्तर
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भारत!
आज एक बार फिर से मैं राष्ट्रप्रेम, महात्मा गांधी जी आदि पर कुछ अमर रचनाएं देने वाले प्रसिद्ध कवि स्वर्गीय सोहनलाल द्विवेदी जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| उनकी कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सोहनलाल द्विवेदी जी की यह कविता – भारत तू है हमको…