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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 16th Dec 2023

    बोलते क्यूँ नहीं!

    बोलते क्यूँ नहीं मिरे हक़ में, आबले पड़ गए ज़बान में क्या|           जौन एलिया 

  • 16th Dec 2023

    मिरे गुमान में क्या!

    ख़ुद को जाना जुदा ज़माने से, आ गया था मिरे गुमान में क्या|            जौन एलिया

  • 16th Dec 2023

    आन-बान में क्या!

    अपनी महरूमियाँ छुपाते हैं, हम ग़रीबों की आन-बान में क्या|            जौन एलिया

  • 16th Dec 2023

    कोई टोकता भी नहीं!

    मुझको तो कोई टोकता भी नहीं, यही होता है ख़ानदान में क्या|           जौन एलिया

  • 16th Dec 2023

    बात बे-असर ही रही!

    मेरी हर बात बे-असर ही रही, नुक़्स है कुछ मिरे बयान में क्या|           जौन एलिया

  • 16th Dec 2023

    मुझको दान में क्या!

    उम्र गुज़रेगी इम्तिहान में क्या, दाग़ ही देंगे मुझको दान में क्या|           जौन एलिया

  • 16th Dec 2023

    क्या भाया!

    आज एक बार मैं अपने समय के श्रेष्ठ कवि, संपादक और नाटक लेखक स्वर्गीय नेमिचन्द्र जैन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| आप अज्ञेय जी द्वारा संपादित ‘तारसप्तक’ के भी एक महत्वपूर्ण कवि थे| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नेमिचन्द्र जैन जी की यह…

  • 15th Dec 2023

    वो गुदगुदाना याद है!

    शौक़ में मेहंदी के वो बे-दस्त-ओ-पा होना तिरा, और मिरा वो छेड़ना वो गुदगुदाना याद है|               हसरत मोहानी  

  • 15th Dec 2023

    वो ठिकाना याद है!

    चोरी चोरी हम से तुम आ कर मिले थे जिस जगह, मुद्दतें गुज़रीं पर अब तक वो ठिकाना याद है|              हसरत मोहानी

  • 15th Dec 2023

    ख़ुद रूठ जाना याद है!

    देखना मुझ को जो बरगश्ता तो सौ सौ नाज़ से, जब मना लेना तो फिर ख़ुद रूठ जाना याद है|               हसरत मोहानी

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