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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 12th Dec 2023

    धीरे धीरे हारे लोग!

    जीवन जीवन हमने जग में खेल यही होते देखा, धीरे धीरे जीती दुनिया धीरे धीरे हारे लोग| जावेद अख़्तर

  • 12th Dec 2023

    कैसे हैं बेचारे लोग!

    दुख के जंगल में फिरते हैं कब से मारे मारे लोग, जो होता है सह लेते हैं कैसे हैं बेचारे लोग| जावेद अख़्तर

  • 12th Dec 2023

    ट्रेन की पटरियाँ

    आज एक बार मैं  हिन्दी के श्रेष्ठ गीतकार और वरिष्ठ कवि श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सोम जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर जी का यह गीत – ट्रेन की पटरियाँकह रही है कथाएक आवारगी से जुड़ी…

  • 11th Dec 2023

    कुछ चराग़ों की साँस!

    कुछ चराग़ों की साँस टूट गई, कुछ ब-मुश्किल दम-ए-सहर आए| गुलज़ार

  • 11th Dec 2023

    बाल-ओ-पर आए!

    एक गोली गई थी सू-ए-फ़लक, इक परिंदे के बाल-ओ-पर आए| गुलज़ार

  • 11th Dec 2023

    आख़िरी पहर आए!

    चंद लम्हे जो लौट कर आए, रात के आख़िरी पहर आए| गुलज़ार

  • 11th Dec 2023

    इल्ज़ाम मेरे सर आए!

    चाँद जितने भी गुम हुए शब के, सब के इल्ज़ाम मेरे सर आए| गुलज़ार

  • 11th Dec 2023

    जो लौट कर आए!

    अपना मेहवर* बदल चुकी थी ज़मीं, हम ख़ला** से जो लौट कर आए| *धुरी, **अंतरिक्ष गुलज़ार

  • 11th Dec 2023

    डूबते नज़र आए!

    जब भी आँखों में अश्क भर आए, लोग कुछ डूबते नज़र आए| गुलज़ार

  • 11th Dec 2023

    कितना चौड़ा पाट नदी का!

    आज एक बार मैं  हिन्दी के श्रेष्ठ कवि और दिनमान पत्रिका के संपादन से जुड़े रहे  स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| सर्वेश्वर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की यह कविता – कितना चौड़ा…

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