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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 31st May 2023

    सब जाने-पहचाने थे!

    रात के ख़्वाब सुनाएँ किस को रात के ख़्वाब सुहाने थे, धुँदले धुँदले चेहरे थे पर सब जाने-पहचाने थे| इब्न-ए-इंशा

  • 31st May 2023

    सुब्ह सहर से पहले!

    चाँद से आँख मिली जी का उजाला जागा, हमको सौ बार हुई सुब्ह सहर से पहले| इब्न-ए-इंशा

  • 31st May 2023

    तिरे दर से पहले!

    हम किसी दर पे न ठिटके न कहीं दस्तक दी, सैकड़ों दर थे मिरी जाँ तिरे दर से पहले| इब्न-ए-इंशा

  • 31st May 2023

    रात ढलती ही नहीं!

    जी बहलता ही नहीं अब कोई साअ‘त कोई पल, रात ढलती ही नहीं चार पहर से पहले| इब्न-ए-इंशा

  • 31st May 2023

    हिज्र का ग़म भी देखा!

    इश्क़ पहले भी किया हिज्र का ग़म भी देखा, इतने तड़पे हैं न घबराए न तरसे पहले| इब्न-ए-इंशा

  • 31st May 2023

    चल दिए उठ के!

    चल दिए उठ के सू-ए-शहर-ए-वफ़ा कू-ए-हबीब, पूछ लेना था किसी ख़ाक-बसर* से पहले| *शोकमग्न इब्न-ए-इंशा

  • 31st May 2023

    इश्क़ में घर से पहले!

    अपने हमराह जो आते हो इधर से पहले, दश्त पड़ता है मियाँ इश्क़ में घर से पहले| इब्न-ए-इंशा

  • 31st May 2023

    अतिथि से!

    आज मैं छायावाद युग की एक प्रमुख कवियित्री स्वर्गीय महादेवी वर्मा जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ|  महादेवी जी की कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय महादेवी वर्मा जी की यह कविता – बनबाला के गीतों सानिर्जन में बिखरा है मधुमास,इन कुंजों में खोज रहा हैसूना…

  • 30th May 2023

    कोई सितारा नहीं!

    बना सकूँ जिसे झूमर तुम्हारे माथे का, फ़लक पे आज भी ऐसा कोई सितारा नहीं| क़तील शिफ़ाई

  • 30th May 2023

    हसरत-ए-नज़ारा नहीं!

    जो तेरी दीद ने बख़्शे वही हैं ज़ख़्म बहुत, अब अपने दिल में कोई हसरत-ए-नज़ारा नहीं| क़तील शिफ़ाई

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