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मैं समर्पित-बीज सा!
आज मैं श्रेष्ठ हिन्दी गीत कवि श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का एक नवगीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| उनकी कुछ रचनाएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र शुक्ल जी का यह नवगीत – मैं वहीं हूँ जिस जगह पहले कभी था लोग कोसों दूर आगे बढ़ गए हैं ।…
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मेरे ये ग़ज़ल के मिसरे!
दर-ओ-दीवार हैं मेरे ये ग़ज़ल के मिसरे, क्या सुख़न-वर से सुख़न-वर का पता पूछता है| राजेश रेड्डी
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बात बदल देता हूँ!
मुस्कुराते हुए मैं बात बदल देता हूँ, जब कोई मुझ से मिरे घर का पता पूछता है| राजेश रेड्डी
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ढूँडते रहते हैं सब लोग!
ढूँडते रहते हैं सब लोग लकीरों में जिसे, वो मुक़द्दर भी सिकंदर का पता पूछता है| राजेश रेड्डी
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सर का पता पूछता है
ख़त्म होते ही नहीं संग किसी दिन उसके, रोज़ वो एक नए सर का पता पूछता है| राजेश रेड्डी
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अंदर का पता पूछता है
ढूँडता रहता हूँ आईने में अक्सर ख़ुद को, मेरा बाहर मिरे अंदर का पता पूछता है| राजेश रेड्डी
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दर का पता पूछता है!
जिसको भी देखो तिरे दर का पता पूछता है, क़तरा क़तरे से समुंदर का पता पूछता है| राजेश रेड्डी
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कलाकार!
आज मैं श्री रामदरश मिश्र जी की एक ही शीर्षक से लिखी दो कविताएँ प्रस्तुत कर रहा हूँ| उनकी कुछ कविताएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री रामदरश मिश्र जी की यह कविताएँ – 1. छोटा हो या बड़ाकच्चा हो या पक्काझोंपड़ी हो या महल, घर तो घर होता हैआदमी…