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एक उमर मुस्कान की!
आज एक बार फिर से मैं अपने प्रिय नवगीतकार स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक नवगीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| रंजक जी की बहुत सी रचनाएँ तथा उनके बारे में अपने अनुभव मैंने पहले भी शेयर किए हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का यह नवगीत – इतनी ही थी अवधि हमारी…
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ख़याल दिल को मिरे!
गुज़र गया वो ज़माना कहूँ तो किससे कहूँ, ख़याल दिल को मिरे सुब्ह ओ शाम किसका था| दाग़ देहलवी