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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 13th Jun 2023

    कोई रास्ता तो दे!

    मैं ख़ुद ही खो गया तुझे पाने की फ़िक्र में, अब ऐ ग़म-ए-हयात कोई रास्ता तो दे|    राना सहरी 

  • 13th Jun 2023

    क्या है बता तो दे!

    बे-शक मिरे नसीब पे रख अपना इख़्तियार, लेकिन मिरे नसीब में क्या है बता तो दे| राना सहरी 

  • 13th Jun 2023

    अपना पता तो दे!

    बरसों मैं तेरे नाम पे खाता रहा फ़रेब, मेरे ख़ुदा कहाँ है तू अपना पता तो दे| राना सहरी 

  • 13th Jun 2023

    इच्छा-शक्ति!

    आज एक बार फिर से मैं प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कवि और कुशल मंच संचालक श्री अशोक चक्रधर जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ|  चक्रधर जी की कुछ रचनाएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक चक्रधर जी की यह कविता  – ओ ठोकर !तू सोच रहीमैं बैठ जाऊंगीरोकर,भ्रम है तेराचल…

  • 12th Jun 2023

    कोई फ़ैसला तो दे!

    मैंने ये कब कहा कि मिरे हक़ में हो जवाब, लेकिन ख़ामोश क्यों है कोई फ़ैसला तो दे| राना सहरी 

  • 12th Jun 2023

    मगर आसरा तो दे!

    मंज़िल न दे चराग़ न दे हौसला तो दे, तिनके का ही सही तू मगर आसरा तो दे| राना सहरी 

  • 12th Jun 2023

    कैसी मसीहाई है!

    कैसे हमदर्द हो तुम कैसी मसीहाई है, दिल पे नश्तर भी लगाते हो तो मरहम की तरह| राना सहरी 

  • 12th Jun 2023

    शबनम की तरह!

    मैंने ख़ुशबू की तरह तुझको किया है महसूस, दिल ने छेड़ा है तिरी याद को शबनम की तरह| राना सहरी 

  • 12th Jun 2023

    मोहर्रम की तरह!

    मेरे महबूब मिरे प्यार को इल्ज़ाम न दे, हिज्र में ईद मनाई है मोहर्रम की तरह| राना सहरी 

  • 12th Jun 2023

    कभी ग़ुंचा कभी शोला!

    कभी ग़ुंचा कभी शोला कभी शबनम की तरह, लोग मिलते हैं बदलते हुए मौसम की तरह| राना सहरी 

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