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आँखों में आँसू आए!
उस ने छू कर मुझे पत्थर से फिर इंसान किया, मुद्दतों बा’द मिरी आँखों में आँसू आए| बशीर बद्र
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शोख़ को जादू आए!
उसकी बातें कि गुल-ओ-लाला पे शबनम बरसे, सब को अपनाने का उस शोख़ को जादू आए| बशीर बद्र
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भुला क्यूँ नहीं देते!
आज मैं प्रसिद्ध शायर और भारतीय फिल्मों में अनेक लोकप्रिय गीतों की सौगात देने वाले श्री हसरत जयपुरी जी की एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ| हसरत जयपुरी जी की बहुत सी रचनाएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री हसरत जयपुरी जी की यह रचना – जब प्यार नहीं…
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ये दुआ माँगी थी!
मैंने दिन रात ख़ुदा से ये दुआ माँगी थी, कोई आहट न हो दर पर मिरे जब तू आए| बशीर बद्र
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फूल से बाज़ू आए!
वक़्त-ए-रुख़्सत कहीं तारे कहीं जुगनू आए, हार पहनाने मुझे फूल से बाज़ू आए| बशीर बद्र
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तिरी ख़ुशबू आए!
मेरी आँखों में तिरे प्यार का आँसू आए, कोई ख़ुशबू मैं लगाऊँ तिरी ख़ुशबू आए| बशीर बद्र
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उदासी से भर गए होते!
बहुत दिनों से है दिल अपना ख़ाली ख़ाली सा, ख़ुशी नहीं तो उदासी से भर गए होते| बशीर बद्र
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फूल चुन लिए वर्ना!
ग़ज़ल ने बहते हुए फूल चुन लिए वर्ना, ग़मों में डूब कर हम लोग मर गए होते| बशीर बद्र