Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 8th Jan 2024

    मस्ती भरी नज़र से!

    होश-ओ-हवास पे मिरे बिजली सी गिर पड़ी, मस्ती भरी नज़र से पिला के चले गए|              हसरत जयपुरी

  • 8th Jan 2024

    बसाते चले गए!

    इस दिल से आ रही है किसी यार की सदा, वीरान मिरा दिल था बसाते चले गए|            हसरत जयपुरी

  • 8th Jan 2024

    बेताबियों को और!

    जो साँस आ रही है उसी का पयाम है, बेताबियों को और बढ़ाते चले गए|           हसरत जयपुरी

  • 8th Jan 2024

    दीवाना ज़िंदगी को!

    उनके ख़याल आए तो आते चले गए, दीवाना ज़िंदगी को बनाते चले गए|            हसरत जयपुरी

  • 8th Jan 2024

    ड्योढ़ी!

    आज एक बार फिर मैं राजस्थान के विख्यात कवि स्वर्गीय हरीश भादानी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| भादानी जी ने राजस्थानी और खड़ी बोली दोनों में अपनी श्रेष्ठ रचनाओं के माध्यम से योगदान किया है| भादानी जी की कुछ रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय…

  • 7th Jan 2024

    हम सा कोई आवारा!

    सहरा में बगूला भी है ‘मजरूह’ सबा भी, हम सा कोई आवारा-ए-आलम तो नहीं है|                     मजरूह सुल्तानपुरी

  • 7th Jan 2024

    शबनम तो नहीं है!

    चाहे वो किसी का हो लहू दामन-ए-गुल पर, सय्याद ये कल रात की शबनम तो नहीं है|               मजरूह सुल्तानपुरी

  • 7th Jan 2024

    कुछ ज़ख़्म ही खाएँ!

    कुछ ज़ख़्म ही खाएँ चलो कुछ गुल ही खिलाएँ, हर-चंद बहाराँ का ये मौसम तो नहीं है|              मजरूह सुल्तानपुरी

  • 7th Jan 2024

    गो रात मिरी सुब्ह की!

    गो रात मिरी सुब्ह की महरम तो नहीं है, सूरज से तिरा रंग-ए-हिना कम तो नहीं है|              मजरूह सुल्तानपुरी

  • 7th Jan 2024

    रहबर ने लूट लिया!

    ‘मजरूह’ क़ाफ़िले की मिरे दास्ताँ ये है, रहबर ने मिल के लूट लिया राहज़न के साथ|              मजरूह सुल्तानपुरी

←Previous Page
1 … 787 788 789 790 791 … 1,532
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,133 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar