Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 10th Jan 2024

    तेरा वा’दा तो नहीं हूँ!

    मेरी तक़दीर में जलना है तो जल जाऊँगा, तेरा वा‘दा तो नहीं हूँ जो बदल जाऊँगा|             साहिर लुधियानवी

  • 10th Jan 2024

    यह दौर सांप का डसा हुआ!

    आज एक बार फिर मैं वाराणसी के विख्यात नवगीतकार स्वर्गीय श्रीकृष्ण तिवारी जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| तिवारी जी की कुछ रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय श्रीकृष्ण तिवारी जी का यह नवगीत – मीठी लगने लगी नीम की पत्ती -पत्तीलगता है यह दौर सांप…

  • 9th Jan 2024

    वहशत तेरे दीवाने में है

    तू कहे तो आसमाँ की धज्जियाँ कर दूँ सनम, आज इक ऐसी ही वहशत तेरे दीवाने में है|                हसरत जयपुरी 

  • 9th Jan 2024

    आँखों के पैमाने में है!

    मय की मस्ती तो उतर जाती है थोड़ी देर में, ज़िंदगी भर का नशा आँखों के पैमाने में है|              हसरत जयपुरी

  • 9th Jan 2024

    किसकी ये तस्वीर है!

    चाँदनी रातों में अक्सर सोचता रहता हूँ मैं, किसकी ये तस्वीर है जो दिल के वीराने में है|               हसरत जयपुरी

  • 9th Jan 2024

    लुत्फ़ जलने में नहीं!

    शम्अ‘ में ताक़त कहाँ जो एक परवाने में है, लुत्फ़ जलने में नहीं जल जल के मर जाने में है|               हसरत जयपुरी

  • 9th Jan 2024

    वो कौन थे जो!

    इतना मुझे बताओ मिरे दिल की धड़कनो, वो कौन थे जो ख़्वाब दिखा कर चले गए|              हसरत जयपुरी

  • 9th Jan 2024

    दामन मिरी नज़र से!

    कहने को वो हसीन थे आँखें थीं बेवफ़ा, दामन मिरी नज़र से बचा कर चले गए|             हसरत जयपुरी

  • 9th Jan 2024

    वसंत के एक दिन – रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…

  • 8th Jan 2024

    आए बहार बन के!

    आए बहार बन के लुभा कर चले गए, क्या राज़ था जो दिल में छुपा कर चले गए|               हसरत जयपुरी

←Previous Page
1 … 786 787 788 789 790 … 1,532
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,133 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar