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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 27th Jun 2023

    तुझे यादगार बना दिया!

    जो रुके तो कोह-ए-गिराँ* थे हम, जो चले तो जाँ से गुज़र गए, रह-ए-यार हमने क़दम क़दम, तुझे यादगार बना दिया|    *Big Mountain फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 27th Jun 2023

    पढ़ के मिटा दिया!

    उधर एक हर्फ़ कि कुश्तनी, यहाँ लाख उज़्र था गुफ़्तनी, जो कहा तो सुन के उड़ा दिया, जो लिखा तो पढ़ के मिटा दिया| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 27th Jun 2023

    क़ातिलों को गुमाँ न हो!

    करो कज जबीं पे सर-ए-कफ़न, मिरे क़ातिलों को गुमाँ न हो, कि ग़ुरूर-ए-इश्क़ का बाँकपन पस-ए-मर्ग हम ने भुला दिया| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 27th Jun 2023

    जो वो क़र्ज़ रखते थे!

    मिरे चारा-गर को नवेद हो सफ़-ए-दुश्मनाँ को ख़बर करो, जो वो क़र्ज़ रखते थे जान पर वो हिसाब आज चुका दिया| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 27th Jun 2023

    दाग़-दाग़ लुटा दिया!

    न गँवाओ नावक-ए-नीम-कश दिल-ए-रेज़ा-रेज़ा गँवा दिया, जो बचे हैं संग समेट लो तन-ए-दाग़-दाग़ लुटा दिया| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 27th Jun 2023

    आग का अपना-पराया क्या!

    आज एक बार फिर से मैं, किसी समय अपनी कविताओं और गीतों से काव्य मंचों पर धूम मचाने वाले प्रसिद्ध कवि और स्वर्गीय शिशुपालसिंह निर्धन जी का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| निर्धन जी की कुछ रचनाएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिशुपालसिंह निर्धन जी का यह गीत…

  • 26th Jun 2023

    वो गुनाहगार चले गए!

    न रहा जुनून-ए-रुख़-ए-वफ़ा ये रसन ये दार करोगे क्या, जिन्हें जुर्म-ए-इश्क़ पे नाज़ था वो गुनाहगार चले गए| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 26th Jun 2023

    दाग़ थे जो सजा के हम

    ये हमीं थे जिनके लिबास पर सर-ए-रह सियाही लिखी गई, यही दाग़ थे जो सजा के हम सर-ए-बज़्म-ए-यार चले गए| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 26th Jun 2023

    इख़्तियार चले गए!

    न सवाल-ए-वस्ल न अर्ज़-ए-ग़म न हिकायतें न शिकायतें, तिरे अहद में दिल-ए-ज़ार के सभी इख़्तियार चले गए| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 26th Jun 2023

    ग़म-गुसार चले गए!

    तिरी कज-अदाई से हार के शब-ए-इंतिज़ार चली गई, मिरे ज़ब्त-ए-हाल से रूठ कर मिरे ग़म-गुसार चले गए| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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