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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 28th Jun 2023

    टूट के याद आई है!

    याद आई है तो फिर टूट के याद आई है, कोई गुज़री हुई मंज़िल कोई भूली हुई दोस्त| अहमद फ़राज़

  • 28th Jun 2023

    नज़र खा गई दोस्त!

    तेरे क़ामत से भी लिपटी है अमर-बेल कोई, मेरी चाहत को भी दुनिया की नज़र खा गई दोस्त| अहमद फ़राज़

  • 28th Jun 2023

    कई दुश्मन कई दोस्त!

    लोग हर बात का अफ़्साना बना देते हैं, ये तो दुनिया है मिरी जाँ कई दुश्मन कई दोस्त| अहमद फ़राज़

  • 28th Jun 2023

    ऐ अजनबी दोस्त!

    तुझ से मिल कर तो ये लगता है कि ऐ अजनबी दोस्त, तू मिरी पहली मोहब्बत थी मिरी आख़िरी दोस्त|

  • 28th Jun 2023

    इश्क़ की आबरू!

    सर-ए-मक़्तल-ए-शब-ए-आरज़ू रहे कुछ तो इश्क़ की आबरू, जो नहीं अदू तो ‘फ़राज़’ तू कि नसीब-ए-दार कोई तो हो| अहमद फ़राज़  

  • 28th Jun 2023

    ये सुकून-ए-जाँ !

    ये सुकून-ए-जाँ की घड़ी ढले तो चराग़-ए-दिल ही न बुझ चले, वो बला से हो ग़म-ए-इश्क़ या ग़म-ए-रोज़गार कोई तो हो| अहमद फ़राज़  

  • 28th Jun 2023

    उजाड़ सी रह-गुज़र!

    ये उदास उदास से बाम ओ दर ये उजाड़ उजाड़ सी रह-गुज़र, चलो हम नहीं न सही मगर सर-ए-कू-ए-यार कोई तो हो| अहमद फ़राज़

  • 28th Jun 2023

    उषा!

    आज मैं प्रसिद्ध कवि स्वर्गीय शमशेर बहादुर सिंह जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिनको कवियों का कवि कहा जाता है| शमशेर जी की अधिक रचनाएँ मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| आज की इस कविता में भोर में सूर्योदय के समय का चित्रण किया गया है| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शमशेर…

  • 27th Jun 2023

    मान लें कि चमन खिले!

    कहीं तार-ए-दामन-ए-गुल मिले तो ये मान लें कि चमन खिले, कि निशान फ़स्ल-ए-बहार का सर-ए-शाख़-सार कोई तो हो| अहमद फ़राज़

  • 27th Jun 2023

    ए’तिबार कोई तो हो!

    किसे ज़िंदगी है अज़ीज़ अब किसे आरज़ू-ए-शब-ए-तरब, मगर ऐ निगार-ए-वफ़ा तलब तिरा ए’तिबार कोई तो हो| अहमद फ़राज़

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