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दीप भोर तक जले!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय शिशुपाल सिंह निर्धन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। निर्धन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिशुपाल सिंह निर्धन जी का यह गीत– गगन की गोद में धरा, धरा पे तम पले,घोर तम की…
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किसी की ख़ातिर तू!
फ़ज़ा उदास है रुत मुज़्महिल है मैं चुप हूँ,जो हो सके तो चला आ किसी की ख़ातिर तू| अहमद फ़राज़
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क्या सोचता है आख़िर तू!
हँसी-ख़ुशी से बिछड़ जा अगर बिछड़ना है,ये हर मक़ाम पे क्या सोचता है आख़िर तू| अहमद फ़राज़
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ऐसे ऐसे लोग रह गए-1
अपने यूट्यूब चैनल शॉर्ट के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में स्वर्गीय मुकुट बिहारी सरोज जी की एक व्यंग्य कविता का एक अंश प्रस्तुत कर रहा हूँ- ऐसे ऐसे लोग रह गए आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******
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दुनिया तुझे बदल देगी!
मैं जानता हूँ कि दुनिया तुझे बदल देगी,मैं मानता हूँ कि ऐसा नहीं ब-ज़ाहिर तू| अहमद फ़राज़
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मिरी मिसाल कि!
मिरी मिसाल कि इक नख़्ल-ए-ख़ुश्क-ए-सहरा हूँ,तिरा ख़याल कि शाख़-ए-चमन का ताइर तू| अहमद फ़राज़
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पेड़
आज फिर से मेरी एक पुरानी रचना प्रस्तुत है, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा पेड़ हमारी आस्थाओं का प्रतिफलन है,पेड़ बनने के लिए ज़रूरी हैकि पहले हम ऐसा बीज हों-जिसे धरती स्वीकार करे,फिर धरती में रचे-बसेरसों-स्वादों, मूल रसायनों से भीहमारा तालमेल हो,तभी हम धरती का सीना चीरकरअपना नाज़ुक सिर, शान से उठा सकेंगे। फिर यहाँ…
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हुई है शाम तो!
हुई है शाम तो आँखों में बस गया फिर तू,कहाँ गया है मिरे शहर के मुसाफ़िर तू| अहमद फ़राज़
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मानी नहीं जाती!
ब-जुज़ दीवानगी वाँ और चारा ही कहो क्या है, जहाँ अक़्ल ओ ख़िरद की एक भी मानी नहीं जाती| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़