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खिजां के फूल पे आती कभी बहार नहीं!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मरे स्वर में यह गीत- खिजां के फूल पे आती कभी बहार नहीं, मेरे नसीब में ऐ दोस्त तेरा प्यार नहीं !फिल्म- दो रास्ते मुख्य कलाकार- राजेश खन्ना, मुमताज़गीतकार- आनंद बक्षी संगीतकार- लक्ष्मीकांत प्यारेलाल गायक- किशोर कुमार प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद।…
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भड़का रहे हैं आग!
आज मैं प्रसिद्ध शायर तथा फिल्मी गीतकार साहिर लुधियानवी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। साहिर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं साहिर लुधियानवी जी की यह ग़ज़ल- भड़का रहे हैं आग लब-ए-नग़्मगर से हम ।ख़ामोश क्यों रहेंगे ज़माने के डर से हम । ले…
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तलाश-ए-इश्क़ रुके!
अभी तो दिल की क़यादत में पाँव निकले हैं, तलाश-ए-इश्क़ रुके तो कहीं क़याम करूँ| महशर आफ़रीदी
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ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं -2
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में कृष्ण बिहारी नूर जी की ग़ज़ल का दूसरा शेर, इस ग़ज़ल को जगजीत सिंह जी ने गाया है- इतने हिस्सों में बंट गया हूँ मैं आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । ******
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आहों पे और काम करूँ!
हर एक साँस रगड़ खा रही है सीने में,और आप कहते हैं आहों पे और काम करूँ| महशर आफ़रीदी
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पत्थर के सनम!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मेरे स्वर में प्रस्तुत है यह गीत- पत्थर के सनम तुझे हमने मोहब्बत का ख़ुदा माना!फ़िल्म – पत्थर के सनममुख्य कलाकार- मनोज कुमार, वहीदा रहमान, मुमताजगीतकार- मजरुह सुल्तानपुरीसंगीतकार- लक्ष्मीकांत प्यारेलालगायक- मोहम्मद रफ़ीप्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******
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जूही की कली!
आज मैं हिंदी कविता के शिखर पुरुष स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। निराला जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की यह प्रसिद्ध कविता– विजन-वन-वल्लरी परसोती थी सुहाग-भरी — स्नेह-स्वप्न-मग्न —अमल-कोमल-तनु तरुणी — जुही की कली,दृग…
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ये सोचता हूँ चराग़ों का!
ये सोचता हूँ चराग़ों का एहतिमाम करूँ, हवा को भूक लगी है कुछ इंतिज़ाम करूँ| महशर आफ़रीदी