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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 28th Jun 2026

    बग़ैर दिल की इजाज़त!

    ख़ता-मुआफ़ मगर इतना बे-अदब भी नहीं,बग़ैर दिल की इजाज़त तुम्हें सलाम करूँ| महशर आफ़रीदी

  • 28th Jun 2026

    खिजां के फूल पे आती कभी बहार नहीं!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मरे स्वर में यह गीत- खिजां के फूल पे आती कभी बहार नहीं, मेरे नसीब में ऐ दोस्त तेरा प्यार नहीं !फिल्म- दो रास्ते मुख्य कलाकार- राजेश खन्ना, मुमताज़गीतकार- आनंद बक्षी संगीतकार- लक्ष्मीकांत प्यारेलाल गायक- किशोर कुमार प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद।…

  • 28th Jun 2026

    भड़का रहे हैं आग!

    आज मैं प्रसिद्ध शायर तथा फिल्मी गीतकार साहिर लुधियानवी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। साहिर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं साहिर लुधियानवी जी की यह ग़ज़ल- भड़का रहे हैं आग लब-ए-नग़्मगर से हम ।ख़ामोश क्यों रहेंगे ज़माने के डर से हम । ले…

  • 27th Jun 2026

    तलाश-ए-इश्क़ रुके!

    अभी तो दिल की क़यादत में पाँव निकले हैं, तलाश-ए-इश्क़ रुके तो कहीं क़याम करूँ| महशर आफ़रीदी

  • 27th Jun 2026

    ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं -2

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में कृष्ण बिहारी नूर जी की ग़ज़ल का दूसरा शेर, इस ग़ज़ल को जगजीत सिंह जी ने गाया है- इतने हिस्सों में बंट गया हूँ मैं आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । ******

  • 27th Jun 2026

    आहों पे और काम करूँ!

    हर एक साँस रगड़ खा रही है सीने में,और आप कहते हैं आहों पे और काम करूँ| महशर आफ़रीदी

  • 27th Jun 2026

    पत्थर के सनम!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मेरे स्वर में प्रस्तुत है यह गीत- पत्थर के सनम तुझे हमने मोहब्बत का ख़ुदा माना!फ़िल्म – पत्थर के सनममुख्य कलाकार- मनोज कुमार, वहीदा रहमान, मुमताजगीतकार- मजरुह सुल्तानपुरीसंगीतकार- लक्ष्मीकांत प्यारेलालगायक- मोहम्मद रफ़ीप्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******

  • 27th Jun 2026

    जूही की कली!

    आज मैं हिंदी कविता के शिखर पुरुष स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। निराला जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की यह प्रसिद्ध कविता– विजन-वन-वल्लरी परसोती थी सुहाग-भरी — स्नेह-स्वप्न-मग्न —अमल-कोमल-तनु तरुणी — जुही की कली,दृग…

  • 26th Jun 2026

    ये सोचता हूँ चराग़ों का!

    ये सोचता हूँ चराग़ों का एहतिमाम करूँ, हवा को भूक लगी है कुछ इंतिज़ाम करूँ| महशर आफ़रीदी

  • 26th Jun 2026

    तू क्यूँ चराग़ ले के!

    मैं पूछता हूँ तुझ को ज़रूरत थी क्या ‘निज़ाम’,तू क्यूँ चराग़ ले के अँधेरे के घर गया| शीन काफ़ निज़ाम

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