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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 26th Jun 2026

    ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में कृष्ण बिहारी नूर जी की ग़ज़ल का शेर –ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं!नूर जी उर्दू के प्रसिद्ध शायर हैं और उनकी यह ग़ज़ल बहुत लोकप्रिय है जिसे जगजीत सिंह जी ने गाया है। आज प्रस्तुत है ग़ज़ल का पहला शेर। आशा है…

  • 26th Jun 2026

    मस्त बहारों का मैं आशिक़!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मेरे स्वर में प्रस्तुत है यह गीत- मस्त बहारों का मैं आशिक़ मैं जो चाहे यार करूं!फ़िल्म- फ़र्ज़मुख्य कलाकार- जितेंद्र, बबीतागीतकार- आनंद बक्षीसंगीतकार- लक्ष्मीकांत प्यारेलालगायक- मोहम्मद रफ़ीप्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *****

  • 26th Jun 2026

    वरदान मांगूंगा नहीं!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय शिवमंगल सिंह सुमन जी की एक प्रसिद्ध रचना शेयर कर रहा हूँ। सुमन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं श्री शिवमंगल सिंह सुमन जी का यह गीत– यह हार एक विराम हैजीवन महासंग्राम हैतिल-तिल मिटूँगा पर दया की भीख मैं लूँगा…

  • 25th Jun 2026

    बरसा जो अब के अब्र!

    पिछले बरस हवेली हमारी खंडर हुई, बरसा जो अब के अब्र तो समझो खंडर गया| शीन काफ़ निज़ाम

  • 25th Jun 2026

    दुआ से असर गया!

    कोई दुआ कभी तो हमारी क़ुबूल कर,वर्ना कहेंगे लोग दुआ से असर गया| शीन काफ़ निज़ाम

  • 25th Jun 2026

    इतने सितारों से भर गया!

    आँसू मिरे तो मेरे ही दामन में आए थे,आकाश कैसे इतने सितारों से भर गया| शीन काफ़ निज़ाम

  • 25th Jun 2026

    ज़िंदगी का मुक़द्दर!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में निदा फ़ाज़ली जी की ग़ज़ल ‘हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी’ के आखिरी दो शेर निदा फ़ाज़ली जी उर्दू शायरी के बेहतरीन स्तंभ थे।इस ग़ज़ल को जगजीत सिंह-चित्रा सिंह ने गाया थाज़िंदगी का मुक़द्दर सफर दर सफर आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****

  • 25th Jun 2026

    मैं उस को था पसंद तो !

    इस फ़िक्र ही में अपनी तो गुज़री तमाम उम्र,मैं उस को था पसंद तो क्यूँ छोड़ कर गया| शीन काफ़ निज़ाम

  • 25th Jun 2026

    मैं आशिक़ हूँ बहारों का!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- मैं आशिक़ हूँ बहारों का, नज़ारों का, फ़िज़ाओं का इशारों काफ़िल्म- आशिक़मुख्य कलाकार- राज कपूर, पद्मिनी, नंदागीतकार- शैलेंद्र, हसरत जयपुरीसंगीतकार- शंकर जयकिशनगायक- मुकेशप्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 24th Jun 2026

    इस तपन से जेठ की घबरा गए थे प्रान!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री शिव बहदुर सिंह भदौरिया जी की रचना शेयर कर रहा हूँ। भदौरिया जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। आज प्रस्तुत हैं श्री शिव बहदुर सिंह भदौरिया जी का यह गीत– इस तपन से जेठ की घबरा गए थे प्रानपर अचानक याद आया एक गंगा स्नान…

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