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न दैर से न हरम से !
न दैर से न हरम से न मय-कदे से मिला,सुकून-ए-रूह मिला है जो तेरे दर से मुझे| गुलज़ार देहलवी
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मैं तो एक ख्वाब हूँ !
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं एक बार फिर फिल्म हिमालय की गोद में, के लिए मुकेश जी का गाया प्रसिद्ध गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- मैं तो एक ख्वाब हूँ इस ख्वाब से तू प्यार न कर! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद।
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पिलाए जा मिरे साक़ी!
सुबू न जाम न मीना से मय पिला बे-शक,पिलाए जा मिरे साक़ी यूँही नज़र से मुझे| गुलज़ार देहलवी
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गगन बजाने लगा जल-तरंग!
आज एक बार फिर मैं हिंदी गीतों के राजकुंवर के नाम से विख्यात स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी की एक अलग तरह की रचना शेयर कर रहा हूँ। नीरज जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी की यह ग़ज़ल, इसमें उन्होंने स्वर्गीय बलबीर…
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उतारना है ये क़र्ज़ा भी!
हयात जिस की अमानत है सौंप दूँ उस को,उतारना है ये क़र्ज़ा भी अपने सर से मुझे| गुलज़ार देहलवी
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हटा सका न कोई!
हमेशा बच के चला हूँ मैं आम राहों से,हटा सका न कोई मेरी रहगुज़र से मुझे| गुलज़ार देहलवी
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फिर एक बार तो!
नज़र झुका के उठाई थी जैसे पहली बार,फिर एक बार तो देखो उसी नज़र से मुझे| गुलज़ार देहलवी
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बिठा के दिल में!
बिठा के दिल में गिराया गया नज़र से मुझे,दिखाया तुरफ़ा-तमाशा बला के घर से मुझे| गुलज़ार देहलवी
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अपना हाल सँभालूँ!
तुम्हारी याद में जीने की आरज़ू है अभी,कुछ अपना हाल सँभालूँ अगर इजाज़त हो| जौन एलिया
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अपने ज़ख़्म दिखा लूँ!
किसे है ख़्वाहिश-ए-मरहम-गरी मगर फिर भी,मैं अपने ज़ख़्म दिखा लूँ अगर इजाज़त हो| जौन एलिया