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अपने घर में आ गया हूँ
उदास हो गया हूँ फिर से इक ज़रा हँस कर, में घूम-घाम के फिर अपने घर में आ गया हूँ| राजेश रेड्डी
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ख़बर में आ गया हूँ!
मिरी शनाख़्त की ख़ातिर छपी मिरी तस्वीर, न जीते-जी सही मर के ख़बर में आ गया हूँ| राजेश रेड्डी
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अगर से दो क़दम आगे
ज़रा सा फ़ासला मैंने भी तय किया तो है, अगर से दो क़दम आगे मगर मैं आ गया हूँ| राजेश रेड्डी
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मिरे हौसलों पे हैराँ है!
ये ज़िंदगी भी मिरे हौसलों पे हैराँ है, समझ रही थी कि मैं उसके डर में आ गया हूँ| राजेश रेड्डी
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सफर पुराना, मंज़िल पुरानी!
Originally posted on SamaySakshi: आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- हमारे फैमिली ग्रुप का नाम ही रहा है- ‘लंदन, गोवा, बंगलौर’, क्योंकि एक-एक बेटा इन तीनों जगह रहते रहे हैं| हम दो बार लंदन भी रह आए हैं, एक बार- एक माह के लिए और…
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अधर में आ गया हूँ!
ज़मीं उछाल चुकी आसमाँ ने थामा नहीं, मैं काएनात में बिल्कुल अधर में आ गया हूँ| राजेश रेड्डी
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सर में आ गया हूँ!
कुछ इस क़दर मैं ख़िरद* के असर में आ गया हूँ, सिमट के सारा का सारा ही सर में आ गया हूँ| *बुद्धि राजेश रेड्डी
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कौन वाक़िफ़ नहीं!
कौन वाक़िफ़ नहीं संसार के सच से लेकिन, सब का संसार की हर चीज़ पे मन डोलता है| राजेश रेड्डी
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आँसू न बहाने पड़ जाएँ
सोच लो कल कहीं आँसू न बहाने पड़ जाएँ, ख़ून का क्या है रगों में वो यूँही खौलता है| राजेश रेड्डी