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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 17th Feb 2024

    क्या बात करें?

    आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी के श्रेष्ठ नवगीतकार श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत – घर की बात करें वे जो घर वाले हैंहम फुटपाथों पर बैठे क्या…

  • 16th Feb 2024

    तमन्ना क्यूँ करें हम!

    हमारी ही तमन्ना क्यूँ करो तुम, तुम्हारी ही तमन्ना क्यूँ करें हम| जौन एलिया

  • 16th Feb 2024

    वफ़ा इख़्लास क़ुर्बानी!

    वफ़ा इख़्लास क़ुर्बानी मोहब्बत, अब इन लफ़्ज़ों का पीछा क्यूँ करें हम| जौन एलिया

  • 16th Feb 2024

    दावा क्यूँ करें हम!

    ये काफ़ी है कि हम दुश्मन नहीं हैं, वफ़ा-दारी का दावा क्यूँ करें हम| जौन एलिया

  • 16th Feb 2024

    कोई हंगामा बरपा!

    ख़मोशी से अदा हो रस्म-ए-दूरी, कोई हंगामा बरपा क्यूँ करें हम| जौन एलिया

  • 16th Feb 2024

    झगड़ा क्यूँ करें हम!

    नया इक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हम, बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँ करें हम| जौन एलिया

  • 16th Feb 2024

    हम को शादमानी है!

    जब से मरने की जी में ठानी है, किस क़दर हम को शादमानी है| जोश मलीहाबादी

  • 16th Feb 2024

    बहुत दिनों तक!

    आज एक बार फिर से मैं, श्रेष्ठ हिन्दी कवि स्वर्गीय शलभ श्रीराम सिंह जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शलभ श्रीराम सिंह जी की यह कविता – पृथ्वी हिलेगी नहीं इस बारधधकेगी भी नहींडूब जाएगी अपने ही पानी में…

  • 15th Feb 2024

    तबस्सुम आ ही जाता है

    समझती हैं मआल-ए-गुल मगर क्या ज़ोर-ए-फ़ितरत है, सहर होते ही कलियों को तबस्सुम आ ही जाता है|                 जोश मलीहाबादी

  • 15th Feb 2024

    वो कुम्हला ही जाता है!

    शगूफ़ों पर भी आती हैं बलाएँ यूँ तो कहने को, मगर जो फूल बन जाता है वो कुम्हला ही जाता है|                 जोश मलीहाबादी

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