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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 18th Feb 2024

    मिरी तामीर के साथ

    मिरे होने में न होने का था सामाँ मौजूद, टूटना मेरा लिखा था मिरी तामीर के साथ| राजेश रेड्डी  

  • 18th Feb 2024

    मिरी तदबीर के साथ!

    है कोई बैर सा उस को मिरी तदबीर के साथ, अब कहाँ तक कोई झगड़ा करे तक़दीर के साथ| राजेश रेड्डी 

  • 18th Feb 2024

    हल्का क्यों करें हम!

    पड़ी रहने दो इंसानों की लाशें, ज़मीं का बोझ हल्का क्यों करें हम| जौन एलिया

  • 18th Feb 2024

    पता नहीं…!

    आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी के श्रेष्ठ रचनाकार, बिल्कुल अलग किस्म की कविताएं लिखने वाले कवि, जिनको अज्ञेय जी द्वारा संपादित प्रमुख काव्य संकलन ‘तारसप्तक’ में भी शामिल किया गया था, ऐसे स्वर्गीय गजानन माधव मुक्तिबोध जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|…

  • 17th Feb 2024

    मुहय्या क्यों करें हम!

    चबा लें क्यों न ख़ुद ही अपना ढाँचा, तुम्हें रातिब मुहय्या क्यों करें हम| जौन एलिया

  • 17th Feb 2024

    पर्दा क्यों करें हम!

    बरहना* हैं सर-ए-बाज़ार तो क्या, भला अंधों से पर्दा क्यों करें हम| *Naked जौन एलिया

  • 17th Feb 2024

    दुनिया की पर्वा क्यूँ!

    नहीं दुनिया को जब पर्वा हमारी, तो फिर दुनिया की पर्वा क्यूँ करें हम| जौन एलिया

  • 17th Feb 2024

    इकट्ठा क्यों करें हम!

    जो इक नस्ल-ए-फ़रोमाया* को पहुँचे, वो सरमाया इकट्ठा क्यों करें हम| *Mean जौन एलिया

  • 17th Feb 2024

    क्यों न फेंकें सारी चीज़ें

    उठा कर क्यों न फेंकें सारी चीज़ें, फ़क़त कमरों में टहला क्यों करें हम| जौन एलिया

  • 17th Feb 2024

    किया था अह्द जब!

    किया था अह्द जब लम्हों में हम ने, तो सारी उम्र ईफ़ा* क्यूँ करें हम| *प्रतिज्ञा पालन जौन एलिया

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