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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 12th Feb 2024

    ग़ैरों पे भरोसा कैसे!

    मुझ को ख़ुद पर भी भरोसा नहीं होने पाता, लोग कर लेते हैं ग़ैरों पे भरोसा कैसे|            कृष्ण बिहारी नूर

  • 12th Feb 2024

    मुड़ के मेरी ही तरफ़!

    मुझ से जब तर्क-ए-तअल्लुक़ का किया अहद तो फिर, मुड़ के मेरी ही तरफ़ आप ने देखा कैसे|              कृष्ण बिहारी नूर

  • 12th Feb 2024

    ख़ुद से मैं तन्हा कैसे!

    हर घड़ी तेरे ख़यालों में घिरा रहता हूँ, मिलना चाहूँ तो मिलूँ ख़ुद से मैं तन्हा कैसे|              कृष्ण बिहारी नूर

  • 12th Feb 2024

    तेज़ था ठहरा कैसे!

    रुक गया आँख से बहता हुआ दरिया कैसे, ग़म का तूफ़ाँ तो बहुत तेज़ था ठहरा कैसे|               कृष्ण बिहारी नूर

  • 12th Feb 2024

    उसकी खिड़की खुली है!

    आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी के प्रसिद्ध आधुनिक कवि श्री अशोक वाजपेयी  जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| अशोक वाजपेयी  जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक वाजपेयी जी की यह कविता – उसकी खिड़की खुली है,उसके आँगन में गूँज रहा…

  • 11th Feb 2024

    जाने किधर गया वो!

    वो रात का बे-नवा मुसाफ़िर वो तेरा शाइर वो तेरा ‘नासिर’, तिरी गली तक तो हम ने देखा था फिर न जाने किधर गया वो|                         नासिर काज़मी  

  • 11th Feb 2024

    सर झुकाए गुज़र गया

    वो जिस के शाने पे हाथ रख कर सफ़र किया तू ने मंज़िलों का, तिरी गली से न जाने क्यूँ आज सर झुकाए गुज़र गया वो|                   नासिर काज़मी  

  • 11th Feb 2024

    कल रात मर गया वो!

    वो हिज्र की रात का सितारा वो हम-नफ़स हम-सुख़न हमारा, सदा रहे उस का नाम प्यारा सुना है कल रात मर गया वो|                     नासिर काज़मी   

  • 11th Feb 2024

    नींद उड़ाने वाला!

    वो मय-कदे को जगाने वाला वो रात की नींद उड़ाने वाला, ये आज क्या उस के जी में आई कि शाम होते ही घर गया वो|                    नासिर काज़मी 

  • 11th Feb 2024

    क्यूँ बे-असर गया वो!

    मिरा तू ख़ूँ हो गया है पानी सितमगरों की पलक न भीगी, जो नाला उट्ठा था रात दिल से न जाने क्यूँ बे-असर गया वो|                  नासिर काज़मी

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