Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 23rd Sep 2023

    तू सौ बरस जिए!

    महदूद हैं दुआएँ मिरे इख़्तियार में, हर साँस पुर-सुकून हो तू सौ बरस जिए| गुलज़ार

  • 23rd Sep 2023

    आँचल का इक सिरा!

    होंटों में ले के रात के आँचल का इक सिरा, आँखों पे रख के चाँद के होंटों का मस* जिए| *स्पर्श गुलज़ार

  • 23rd Sep 2023

    गए सारे कारवाँ!

    सहरा के उस तरफ़ से गए सारे कारवाँ, सुन सुन के हम तो सिर्फ़ सदा-ए-जरस* जिए| *घंटियों की आवाज़ गुलज़ार

  • 23rd Sep 2023

    दो चार लम्हे बस में थे!

    सदियों पे इख़्तियार नहीं था हमारा दोस्त, दो चार लम्हे बस में थे दो चार बस जिए| गुलज़ार

  • 23rd Sep 2023

    हज़ारों बरस जिए!

    हर एक ग़म निचोड़ के हर इक बरस जिए, दो दिन की ज़िंदगी में हज़ारों बरस जिए| गुलज़ार

  • 23rd Sep 2023

    हमें देख के शरमाए हैं!

    उनकी जानिब न किसी ने देखा, जो हमें देख के शरमाए हैं| जाँ निसार अख़्तर

  • 23rd Sep 2023

    किस वास्ते घबराए हैं!

    इतने मायूस तो हालात नहीं, लोग किस वास्ते घबराए हैं| जाँ निसार अख़्तर

  • 23rd Sep 2023

    हीरे कभी चुन लाए हैं!

    संग-रेज़ों से ख़ज़फ़-पारों* से, कितने हीरे कभी चुन लाए हैं| *पत्थरों और ठीकरों जाँ निसार अख़्तर

  • 23rd Sep 2023

    चैन!

    आज एक बार फिर मैं अनेक सम्मान एवं पुरस्कारों से अलंकृत, अपने समय के प्रतिष्ठित कवि स्वर्गीय भारत भूषण अग्रवाल जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| स्वर्गीय अग्रवाल जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भारत भूषण अग्रवाल जी की यह कविता- ज़िंदगी को पकड़ूँया अपनी…

  • 22nd Sep 2023

    राह पे ले आए हैं!

    ज़िंदगी तेरे हवादिस हमको, कुछ न कुछ राह पे ले आए हैं| जाँ निसार अख़्तर

←Previous Page
1 … 722 723 724 725 726 … 1,398
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,143 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar