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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 10th Apr 2024

    शा’इर हिकायतें न सुना

    शा‘इर हिकायतें* न सुना वस्ल ओ इश्क़ की, इतना बड़ा मज़ाक़ न कर शाइरी के साथ| *Stories कैफ़ भोपाली

  • 10th Apr 2024

    मिरी आवारगी के साथ!

    शाइस्तगान-ए-शहर मुझे ख़्वाह कुछ कहें, सड़कों का हुस्न है मिरी आवारगी के साथ| कैफ़ भोपाली

  • 10th Apr 2024

    अपना यही अमल है!

    चलते हैं बच के शैख़-ओ-बरहमन के साए से, अपना यही अमल है बुरे आदमी के साथ| कैफ़ भोपाली

  • 10th Apr 2024

    घोषणापत्र!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि और बाल पत्रिका ‘पराग’ के संपादक रहे स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| नंदन जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी की यह कविता – किसी नागवार गुज़रती चीज परमेरा…

  • 9th Apr 2024

    उम्मीद बाँधिए न!

    साया है कम खजूर के ऊँचे दरख़्त का, उम्मीद बाँधिए न बड़े आदमी के साथ| कैफ़ भोपाली

  • 9th Apr 2024

    कुटिया में कौन आएगा

    कुटिया में कौन आएगा इस तीरगी के साथ, अब ये किवाड़ बंद करो ख़ामुशी के साथ| कैफ़ भोपाली

  • 9th Apr 2024

    जो भी है मदारी है!

    गाँव में मोहब्बत की रस्म है अभी ‘मंज़र’, शहर में हमारे तो जो भी है मदारी है|     मंज़र भोपाली

  • 9th Apr 2024

    अब भी जंग जारी है!

    कर्बला नहीं लेकिन झूट और सदाक़त में, कल भी जंग जारी थी अब भी जंग जारी है| मंज़र भोपाली

  • 9th Apr 2024

    ये सदी हमारी है!

    कह दो ‘मीर’ ओ ‘ग़ालिब’ से हम भी शेर कहते हैं, वो सदी तुम्हारी थी ये सदी हमारी है| मंज़र भोपाली

  • 9th Apr 2024

    आज तक कुँवारी है!

    बाप बोझ ढोता था क्या जहेज़ दे पाता, इस लिए वो शहज़ादी आज तक कुँवारी है| मंज़र भोपाली

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