-
तूने रैन गंवाई सोय के!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं कबीर दास जी के कुछ पद, जिनको मुकेश जी ने गाया है उनको अपने स्वर में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा हूँ- तूने रैन गंवाई सोय के, दिवस गंवाया खाय के,हीरा जनम अमोल था, कौड़ी बदले जाय! आशा है आपको यह पसंद आएगा।धन्यवाद।
-
कल फिर सुबह नई होगी!
आज मैं हिंदी के एक श्रेष्ठ साहित्यकार स्वर्गीय रामदरश मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। मिश्र जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामदरश मिश्र जी का यह नवगीत – दिन को ही हो गई रात-सी, लगता कालजयी होगीकविता बोली- “मत उदास हो,…
-
जाने क्या सोच के!
जाने क्या सोच के उस बुत ने उलट दी है नक़ाब, और फिर वो भी सर-ए-बाम ख़ुदा ख़ैर करे। बाल स्वरुप राही
-
लाखों तूफ़ान कि !
लाखों तूफ़ान कि जिस दिल में बसे रहते थे,आज-कल है वहाँ आराम ख़ुदा ख़ैर करे। बाल स्वरुप राही
-
दर्द ने आ पकड़ा है!
फिर रँगे-हाथ मुझे दर्द ने आ पकड़ा है,फिर मोहब्बत का है इल्ज़ाम ख़ुदा ख़ैर करे। बाल स्वरुप राही
-
उन को मुझसे है कोई!
है ये अफ़्वाह बड़े ज़ोर पे हर महफ़िल में,उन को मुझ से है कोई काम ख़ुदा ख़ैर करे। बाल स्वरुप राही
-
उनके होंटों पे मिरा !
लोग कहते हैं कि वो मुझ पे मेहरबान हैं फिर,उन के होंटों पे मिरा नाम ख़ुदा ख़ैर करे। बाल स्वरुप राही
-
आज फिर रंग पे है!
आज फिर रंग पे है शाम ख़ुदा ख़ैर करे,फिर मिरे हाथ में है जाम ख़ुदा ख़ैर करे। बाल स्वरुप राही
-
तीरगी की क़ैद में हूँ!
गुनाह ये है कि क्यूँ अपना नाम रखा ‘नूर’,वो दिन और आज का दिन तीरगी की क़ैद में हूँ| कृष्ण बिहारी नूर