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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 18th Mar 2024

    आँगन में न दीवार उठे!

    मिरी ख़्वाहिश है कि आँगन में न दीवार उठे, मिरे भाई मिरे हिस्से की ज़मीं तू रख ले| राहत इंदौरी

  • 18th Mar 2024

    मिरे बाज़ू रख ले!

    तुझ को अन-देखी बुलंदी में सफ़र करना है, एहतियातन मिरी हिम्मत मिरे बाज़ू रख ले| राहत इंदौरी

  • 18th Mar 2024

    तो ख़ुश्बू रख ले!

    वो कोई जिस्म नहीं है कि उसे छू भी सकें, हाँ अगर नाम ही रखना है तो ख़ुश्बू रख ले| राहत इंदौरी

  • 18th Mar 2024

    सोने की तराज़ू रख ले!

    तू जो चाहे तो तिरा झूट भी बिक सकता है, शर्त इतनी है कि सोने की तराज़ू रख ले| राहत इंदौरी

  • 18th Mar 2024

    मिरे आँसू रख ले!

    इसे सामान-ए-सफ़र जान ये जुगनू रख ले, राह में तीरगी होगी मिरे आँसू रख ले| राहत इंदौरी

  • 18th Mar 2024

    वन-वन, उपवन!

    एक बार फिर मैं छायावाद काल से प्रारंभ कर रहा हूँ, इस क्रम में आज मैं छायावाद के प्रमुख स्तंभ स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| पंत जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की यह रचना – वन-वन,…

  • 17th Mar 2024

    उन सियाह बालों में!

    जैसे आधी शब के बा‘द चाँद नींद में चौंके, वो गुलाब की जुम्बिश उन सियाह बालों में| बशीर बद्र

  • 17th Mar 2024

    खो गए उजालों में!

    मेरी आँख के तारे अब न देख पाओगे, रात के मुसाफ़िर थे खो गए उजालों में| बशीर बद्र

  • 17th Mar 2024

    फूल के प्यालों में!

    यूँ किसी की आँखों में सुब्ह तक अभी थे हम, जिस तरह रहे शबनम फूल के प्यालों में| बशीर बद्र

  • 17th Mar 2024

    जैसे कोई चुटकी ले!

    रात तेरी यादों ने दिल को इस तरह छेड़ा, जैसे कोई चुटकी ले नर्म नर्म गालों में| बशीर बद्र

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