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तुम मोहब्बत में कहाँ!
तुम मोहब्बत में कहाँ सूद-ओ-ज़ियाँ ले आए,इश्क़ का नाम ख़िरद है न जुनूँ है यूँ है| अहमद फ़राज़
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नोक-ए-हर-ख़ार पे!
तुम ने देखी ही नहीं दश्त-ए-वफ़ा की तस्वीर,नोक-ए-हर-ख़ार पे इक क़तरा-ए-ख़ूँ है यूँ है| अहमद फ़राज़
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एक साया न दरूँ है!
जैसे कोई दर-ए-दिल पर हो सितादा कब से,एक साया न दरूँ है न बरूँ है यूँ है| अहमद फ़राज़
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मुझे डर लगता है!
एक मुद्दत से मिरी माँ नहीं सोई ‘ताबिश’ मैं ने इक बार कहा था मुझे डर लगता है | अब्बास ताबिश
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मंज़िलें पाँव पकड़ती!
मंज़िलें पाँव पकड़ती हैं ठहरने के लिए शौक़ कहता है कि दो चार क़दम और सही साहिर लखनवी
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कहते हैं यूँ है यूँ है!
उस का अपना ही करिश्मा है फ़ुसूँ है यूँ है,यूँ तो कहने को सभी कहते हैं यूँ है यूँ है| अहमद फ़राज़