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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 30th Sep 2024

    परिंदे को चोट आई!

    उस परिंदे को चोट आई तो,आप ने एक एक पर देखा| दुष्यंत कुमार

  • 30th Sep 2024

    गालियों में बड़ा असर!

    नालियों में हयात देखी है,गालियों में बड़ा असर देखा| दुष्यंत कुमा

  • 30th Sep 2024

    रास्ता अगर देखा!

    रास्ता काट कर गई बिल्ली,प्यार से रास्ता अगर देखा| दुष्यंत कुमार

  • 30th Sep 2024

    ठहरा हुआ सफ़र!

    पाँव टूटे हुए नज़र आए,एक ठहरा हुआ सफ़र देखा| दुष्यंत कुमार

  • 30th Sep 2024

    वीरान अपना घर!

    आज वीरान अपना घर देखा,तो कई बार झाँक कर देखा| दुष्यंत कुमार

  • 30th Sep 2024

    मेरी कुछ और रचनाएं-4

    एक बार फिर से कुछ पुरानी रचनाएं मिल गईं सोचा इनको भी ढोल पीट लेता हूँ, क्योंकि बहुत समय पहले 1980 में दिल्ली छोड़ दी थी और रचनाकर्म भी लगभग छूट ही गया था| अधिकतर सुदूर प्रोजेक्ट्स में रहा और अब 7 से अधिक वर्षों से गोवा में रह रहा हूँ, जहां साहित्यिक सपोर्ट और…

  • 29th Sep 2024

    कहने की सज़ा लो!

    लोग कहते थे कि ये बात नहीं कहने की,तुम ने कह दी है तो कहने की सज़ा लो यारो| दुष्यंत कुमार

  • 29th Sep 2024

    कैसे आकाश में!

    कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता,एक पत्थर तो तबीअ’त से उछालो यारो| दुष्यंत कुमार

  • 29th Sep 2024

    बहकती हुई दुनिया!

    रहनुमाओं की अदाओं पे फ़िदा है दुनिया,इस बहकती हुई दुनिया को सँभालो यारो| दुष्यंत कुमार

  • 29th Sep 2024

    आज संदूक़ से वो!

    आज सीवन को उधेड़ो तो ज़रा देखेंगे,आज संदूक़ से वो ख़त तो निकालो यारो| दुष्यंत कुमार

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