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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 21st Mar 2024

    फिर से ऐ दिल!

    मुद्दतों बा‘द वो आएगा हमारे घर में, फिर से ऐ दिल किसी उम्मीद को ज़िंदा कर ले| मुनव्वर राना

  • 21st Mar 2024

    सामने तौबा कर ले!

    गर कभी रोना ही पड़ जाए तो इतना रोना, आ के बरसात तिरे सामने तौबा कर ले| मुनव्वर राना

  • 21st Mar 2024

    मातृ वंदना

    आज मैं छायावाद युग की प्रमुख कवियित्री स्वर्गीया महादेवी वर्मा जी की एक प्रसिद्ध रचना शेयर कर रहा हूँ| महादेवी जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीया महादेवी वर्मा जी की यह रचना – वे मुस्काते फूल, नहींजिनको आता है मुर्झाना,वे तारों के दीप, नहींजिनको भाता है…

  • 20th Mar 2024

    कोई मीठा कर ले!

    अब बड़े लोगों से अच्छाई की उम्मीद न कर, कैसे मुमकिन है करैला कोई मीठा कर ले| मुनव्वर राना

  • 20th Mar 2024

    आज तक़ाज़ा कर ले!

    आज का काम तुझे आज ही करना होगा, कल जो करना है तो फिर आज तक़ाज़ा कर ले| मुनव्वर राना 

  • 20th Mar 2024

    दिल ये इरादा कर ले!

    ख़ुद-ब-ख़ुद रास्ता दे देगा ये तूफ़ान मुझे, तुझ को पाने का अगर दिल ये इरादा कर ले| मुनव्वर राना

  • 20th Mar 2024

    वर्ना जो आए समझ में!

    अब मुझे पार उतर जाने दे ऐसा कर ले, वर्ना जो आए समझ में तिरी दरिया कर ले| मुनव्वर राना 

  • 20th Mar 2024

    कमरे में अँधेरा कर ले!

    काले कपड़े नहीं पहने हैं तो इतना कर ले, इक ज़रा देर को कमरे में अँधेरा कर ले| मुनव्वर राना 

  • 20th Mar 2024

    छत पे उतर जाना है!

    एक बे-नाम से रिश्ते की तमन्ना ले कर, इस कबूतर को किसी छत पे उतर जाना है| मुनव्वर राना

  • 20th Mar 2024

    और पत्तों को!

    ज़िंदगी ताश के पत्तों की तरह है मेरी, और पत्तों को बहर-हाल बिखर जाना है| मुनव्वर राना 

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