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तन्हा हो सा जाता हूँ!
मैं तुम से दूर रहता हूँ तो मेरे साथ रहती हो, तुम्हारे पास आता हूँ तो तन्हा हो सा जाता हूँ| जाँ निसार अख़्तर
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अपना हो सा जाता हूँ!
मुझे मालूम है मैं सारी दुनिया की अमानत हूँ , मगर वो लम्हा जब मैं सिर्फ़ अपना हो सा जाता हूँ | जाँ निसार अख़्तर
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साँस लिए जाते होंगे!
मेरा साँस उखड़ते ही सब बैन करेंगे रोएँगे, या‘नी मेरे बा’द भी या’नी साँस लिए जाते होंगे| जौन एलिया
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परिचय/हुंकार!
आज मैं राष्ट्रकवि स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| दिनकर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर जी की यह रचना – सलिल कण हूँ, या पारावार हूँ मैंस्वयं छाया, स्वयं आधार हूँ मैंबँधा हूँ, स्वपन हूँ,…
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क़यामत बाँहों का!
यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का, वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे| जौन एलिया
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और बिखर जाते होंगे!
उस की याद की बाद-ए-सबा में और तो क्या होता होगा, यूँही मेरे बाल हैं बिखरे और बिखर जाते होंगे| जौन एलिया
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आते हैं आते होंगे!
वो जो न आने वाला है ना उस से मुझ को मतलब था, आने वालों से क्या मतलब आते हैं आते होंगे| जौन एलिया
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मेरे बुझने का नज़्ज़ारा!
शाम हुए ख़ुश-बाश यहाँ के मेरे पास आ जाते हैं, मेरे बुझने का नज़्ज़ारा करने आ जाते होंगे| जौन एलिया
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जितने भी सितम!
हम-सफ़र लैला भी होगी मैं तभी जाऊँगा, मुझ पे जितने भी सितम करने हों सहरा कर ले| मुनव्वर राना