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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th Jan 2026

    अजब दर्द था ‘मुनीर’!

    उस आख़िरी नज़र में अजब दर्द था ‘मुनीर’,जाने का उस के रंज मुझे उम्र भर रहा| मुनीर नियाज़ी

  • 5th Jan 2026

    कोई है भी या नहीं!

    ख़ौफ़ आसमाँ के साथ था सर पर झुका हुआ,कोई है भी या नहीं है यही दिल में डर रहा| मुनीर नियाज़ी

  • 5th Jan 2026

    मैं रोया परदेस में!

    अपने यूट्यूब चैनल के साथ मैं फिर उपस्थित हूँ, इस बार मैं निदा फाज़ली साहब के लिखे कुछ दोहे अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जिनको जगजीत सिंह जी ने गाया था, जैसे- मैं रोया परदेस में, भीगा मां का प्यार, दुख ने दुख से बात की, बिन चिट्ठी, बिन तार। आशा है आपको…

  • 5th Jan 2026

    दूरी का ये तिलिस्म!

    गुज़री है क्या मज़े से ख़यालों में ज़िंदगी,दूरी का ये तिलिस्म बड़ा कारगर रहा| मुनीर नियाज़ी

  • 5th Jan 2026

    मेरी सदा हवा में!

    मेरी सदा हवा में बहुत दूर तक गई,पर मैं बुला रहा था जिसे बे-ख़बर रहा| मुनीर नियाज़ी

  • 5th Jan 2026

    नाम बड़े और दर्शन 2

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में काका हाथरसी जी की कविता ‘नाम बडे और दर्शन छोटे’ का एक और अंश प्रस्तुत कर रहा हूँ। नाम बड़े और दर्शन छोटे-2 आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****

  • 5th Jan 2026

    फिर पानी दे मौला!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में, निदा फाज़ली साहब की प्रार्थना पूर्ण ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे जगजीत सिंह जी ने गाया है- गरज-बरस प्यासी धरती पर फिर पानी दे मौला! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद ।

  • 5th Jan 2026

    साया सा एक देर!

    सुब्ह-ए-सफ़र की रात थी तारे थे और हवा,साया सा एक देर तलक बाम पर रहा| मुनीर नियाज़ी

  • 5th Jan 2026

    इंद्रधनुष सपनों को!

    आज फिर से मेरा एक पुराना गीत प्रस्तुत है, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- इंद्रधनुष सपनों को, पथरीले अनुभव कीताक पर धरें,आओ हम तुम मिलकर, रोज़गार दफ्तर कीफाइलें भरें। गर्मी में सड़कों का ताप बांट लें,सर्दी में पेड़ों के साथ कांप लें,बूंद-बूंद रिसकर आकाश से झरें।रोज़गार दफ्तर की फाइलें भरें॥ ढांपती दिशाओं को, हीन ग्रंथियां,फूटतीं…

  • 4th Jan 2026

    दिल जल रहा था!

    दिल जल रहा था ग़म से मगर नग़्मा-गर रहा,जब तक रहा मैं साथ मिरे ये हुनर रहा| मुनीर नियाज़ी

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