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क़ाबिल हो जाओ!
इश्क़ क्या कार-ए-हवस भी कोई आसान नहीं, ख़ैर से पहले इसी काम के क़ाबिल हो जाओ| इरफ़ान सिद्दीक़ी
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मुश्किल इस नादान को समझाना होता है!
आज फिर से एक पुरानी पोस्ट दोहरा रहा हूँ| आज एक गीत 1971 की फिल्म ‘स्वीटहार्ट’ से, हमारे प्रिय गायक मुकेश जी के मधुर स्वर में, इसका संगीत तैयार किया है कल्याणजी आनंदजी की संगीतमय जोड़ी ने और गीत लिखा था आनंद बख्शी जी ने| मुझे यह गीत विशेष रूप से प्रिय है और इसमें…
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ख़ाक बन जाओ और!
वो सितमगर तुम्हें तस्ख़ीर* किया चाहता है, ख़ाक बन जाओ और उस शख़्स को हासिल हो जाओ| *काबू में करना इरफ़ान सिद्दीक़ी
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बढ़ के इक दिन उसी!
जिस पे होता ही नहीं ख़ून-ए-दो-आलम साबित, बढ़ के इक दिन उसी गर्दन में हमाइल* हो जाओ| *झूल जाओ इरफ़ान सिद्दीक़ी
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रंग दिखाता है जुनूँ!
दश्त से दूर भी क्या रंग दिखाता है जुनूँ, देखना है तो किसी शहर में दाख़िल हो जाओ| इरफ़ान सिद्दीक़ी
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तो क़ातिल हो जाओ!
मेरे होने में किसी तौर से शामिल हो जाओ, तुम मसीहा नहीं होते हो तो क़ातिल हो जाओ| इरफ़ान सिद्दीक़ी
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मृत्यु-अक्षांशों तक!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि और मधुर गीतकार श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सोम जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर जी का यह गीत – उफ़ने ज्वालामुखी मृत्यु – अक्षान्शो तकगूंगी -नंगी सदी नहाई…