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तेज़ हवा सोच में गुम है!
क्या जानिए क्यूँ तेज़ हवा सोच में गुम है, ख़्वाबीदा परिंदों को दरख़्तों से उड़ा कर| मोहसिन नक़वी
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ये कतबे भी पढ़ा कर!
उजड़े हुए लोगों से गुरेज़ाँ* न हुआ कर, हालात की क़ब्रों के ये कतबे भी पढ़ा कर| *दूर रहना मोहसिन नक़वी
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जिस्म से बाहर निकल रहा हूँ मैं!
मैं ख़्वाब देख रहा हूँ कि वो पुकारता है, और अपने जिस्म से बाहर निकल रहा हूँ मैं| इरफ़ान सिद्दीक़ी
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गंगा मइया!
आज एक बार फिर मैं प्रसिद्ध नवगीतकार स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी का यह गीत – ‘गंगोत्री में पलना झूलेआगे चले बकइयाँभागीरथी घुटुरवन डोले शैल-शिखर की छइयाँ छिन छिपती, छिन हौले किलकेछिन…
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तिरे साथ चल रहा हूँ मैं!
ग़ुबार-ए-राहगुज़र का ये हौसला भी तो देख, हवा-ए-ताज़ा तिरे साथ चल रहा हूँ मैं| इरफ़ान सिद्दीक़ी
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पैरहन-ए-जाँ बदल रहा हूँ मैं!
बुला रहा है मिरा जामा-ज़ेब* मिलने को, तो आज पैरहन-ए-जाँ बदल रहा हूँ मैं| इरफ़ान सिद्दीक़ी
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कि ढल रहा हूँ मैं!
तुझी पे ख़त्म है जानाँ मिरे ज़वाल* की रात, तू अब तुलू** भी हो जा कि ढल रहा हूँ मैं| *अस्त होना, **उदित होना इरफ़ान सिद्दीक़ी
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दोनों किनारों से जल रहा हूँ मैं!
बदन के दोनों किनारों से जल रहा हूँ मैं, कि छू रहा हूँ तुझे और पिघल रहा हूँ मैं| इरफ़ान सिद्दीक़ी
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नाम बताना भी नहीं चाहता है!
मेरे लफ़्ज़ों में भी छुपता नहीं पैकर उस का, दिल मगर नाम बताना भी नहीं चाहता है| इरफ़ान सिद्दीक़ी
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जो तुमको हो पसंद!
आज एक बार फिर मैं एक फिल्मी गीत के बोल शेयर कर रहा हूँ| ये गीत सफ़र फिल्म के लिए इंदीवर जी ने लिखा था, कल्याणजी-आनंदजी की जोड़ी ने इसका संगीत दिया था और मेरे प्रिय गायक मुकेश जी ने इसको अपने मधुर स्वर ढालकर अमर कर दिया था| लीजिए आज प्रस्तुत हैं इस फिल्मी…