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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 15th Nov 2024

    तिरी सवारी है!

    इक महक सम्त-ए-दिल से आई थी,मैं ये समझा तिरी सवारी है| जौन एलिया

  • 15th Nov 2024

    पुरातन और नूतन – रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट|आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत…

  • 14th Nov 2024

    उस की यादगारी है!

    हिज्र हो या विसाल हो कुछ हो,हम हैं और उस की यादगारी है| जौन एलिया

  • 14th Nov 2024

    तेरी इंतिज़ारी है!

    उस से कहियो कि दिल की गलियों में,रात दिन तेरी इंतिज़ारी है| जौन एलिया

  • 14th Nov 2024

    नींद भी तुम्हारी है!

    बिन तुम्हारे कभी नहीं आई,क्या मिरी नींद भी तुम्हारी है| जौन एलिया

  • 14th Nov 2024

    अपना साया भी!

    निघरे क्या हुए कि लोगों पर,अपना साया भी अब तो भारी है| जौन एलिया

  • 14th Nov 2024

    वो ज़िंदगी गुज़ारी है!

    जो गुज़ारी न जा सकी हम से,हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है| जौन एलिया

  • 14th Nov 2024

    बे-क़रारी सी!

    बे-क़रारी सी बे-क़रारी है,वस्ल है और फ़िराक़ तारी है| जौन एलिया

  • 14th Nov 2024

    मेरा साँस उखड़ते ही!

    मेरा साँस उखड़ते ही सब बैन करेंगे रोएँगे,या’नी मेरे बा’द भी या’नी साँस लिए जाते होंगे| जौन एलिया

  • 14th Nov 2024

    ज़िंदगी की कहानी!

    आज मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| शास्त्री जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी की यह कविता – ज़िंदगी की कहानी रही अनकही ! दिन गुज़रते रहे, साँस चलती रही ! अर्थ…

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