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वो तो मर जाते होंगे!
यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का,वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे| जौन एलिया
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मेरे बाल हैं बिखरे!
उस की याद की बाद-ए-सबा में और तो क्या होता होगा,यूँही मेरे बाल हैं बिखरे और बिखर जाते होंगे| जौन एलिया
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आते हैं आते होंगे!
वो जो न आने वाला है ना उस से मुझ को मतलब था,आने वालों से क्या मतलब आते हैं आते होंगे| जौन एलिया
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मेरे पास आ जाते हैं!
शाम हुए ख़ुश-बाश यहाँ के मेरे पास आ जाते हैं,मेरे बुझने का नज़्ज़ारा करने आ जाते होंगे| जौन एलिया
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सवाल ग़ुम जवाब ग़ुम!
लबों से लब जो मिल गए, लबों से लब जो सिल गए,सवाल ग़ुम जवाब ग़ुम, बड़ी हसीन रात थी| सुदर्शन फ़ाकिर
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शब्द संभव हैं!
आज मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय चंद्रकांत देवताले जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| देवताले जी की अधिक रचनाएं शायद मैंने पहले कभी शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय चंद्रकांत देवताले जी की यह कविता – तुम मुझसे पूछ रही होऔर मैं तुमसेपर सचमुच क्या हमारे बीचशब्द जीवित…
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हुई वही किताब ग़ुम!
लिखा था जिस किताब में, कि इश्क़ तो हराम है,हुई वही किताब ग़ुम, बड़ी हसीन रात थी| सुदर्शन फ़ाकिर
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ख़ुद ही शम्मा बुझ गई!
मुझे पिला रहे थे वो कि ख़ुद ही शम्मा बुझ गई,गिलास ग़ुम शराब ग़ुम, बड़ी हसीन रात थी| सुदर्शन फ़ाकिर
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बड़ी हसीन रात थी!
चराग़-ओ-आफ़्ताब ग़ुम, बड़ी हसीन रात थी,शबाब की नक़ाब ग़ुम, बड़ी हसीन रात थी| सुदर्शन फ़ाकिर