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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th Jul 2024

    जाने दो जो गया जैसे!

    कुछ बिछड़ने के भी तरीक़े हैं, ख़ैर जाने दो जो गया जैसे|    जावेद अख़्तर

  • 5th Jul 2024

    ग़म की धूप में था!

    जागता ज़ेहन ग़म की धूप में था, छाँव पाते ही सो गया जैसे| जावेद अख़्तर

  • 5th Jul 2024

    दीवार धो गया जैसे!

    दाग़ बाक़ी नहीं कि नक़्श कहूँ, कोई दीवार धो गया जैसे| जावेद अख़्तर

  • 5th Jul 2024

    भ्रूण हत्या!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठकवि और सांसद भी रहे श्री उदयप्रताप सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| उदयप्रताप जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री उदयप्रताप सिंह जी की यह कविता-   उनको भी है जीने का अधिकार उन्हें भी जीने दोदेना…

  • 4th Jul 2024

    पत्थर का हो गया जैसे!

    दिल का हर दर्द खो गया जैसे, मैं तो पत्थर का हो गया जैसे| जावेद अख़्तर

  • 4th Jul 2024

    सिर्फ़ लफ़्ज़ सुनते हो!

    जानता हूँ मैं तुम को ज़ौक़-ए-शाएरी भी है शख़्सियत सजाने में इक ये माहरी भी है, फिर भी हर्फ़ चुनते हो सिर्फ़ लफ़्ज़ सुनते हो उन के दरमियाँ क्या है तुम न जान पाओगे| जावेद अख़्तर

  • 4th Jul 2024

    तुमको कब नज़र आई

    ना-मुराद दिल कैसे सुब्ह-ओ-शाम करते हैं कैसे ज़िंदा रहते हैं और कैसे मरते हैं, तुम को कब नज़र आई ग़म-ज़दों की तन्हाई ज़ीस्त बे-अमाँ क्या है तुम न जान पाओगे| जावेद अख़्तर

  • 4th Jul 2024

    ज़ख़्म कैसे फलते हैं!

    ज़ख़्म कैसे फलते हैं दाग़ कैसे जलते हैं दर्द कैसे होता है कोई कैसे रोता है, अश्क क्या है नाले क्या दश्त क्या है छाले क्या आह क्या फ़ुग़ाँ क्या है तुम न जान पाओगे| जावेद अख़्तर

  • 4th Jul 2024

    तुम मरीज़-ए-दानाई!

    वस्ल का सुकूँ क्या है हिज्र का जुनूँ क्या है हुस्न का फ़ुसूँ क्या है इश्क़ का दरूँ क्या है, तुम मरीज़-ए-दानाई मस्लहत के शैदाई राह-ए-गुम-रहाँ क्या है तुम न जान पाओगे| जावेद अख़्तर

  • 4th Jul 2024

    साँस कैसे रुकती है!

    कोई कैसे मिलता है फूल कैसे खिलता है आँख कैसे झुकती है साँस कैसे रुकती है, कैसे रह निकलती है कैसे बात चलती है शौक़ की ज़बाँ क्या है तुम न जान पाओगे| जावेद अख़्तर

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