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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 3rd Jan 2025

    ये बुत जो हम ने!

    ये बुत जो हम ने दोबारा बना के रक्खा है,इसी ने हम को तमाशा बना के रक्खा है| मुनव्वर राना

  • 3rd Jan 2025

    बेवफ़ाई खेल का!

    बेवफ़ाई खेल का हिस्सा है जाने दे इसे,तज़्किरा उस से न कर शर्मिंदगी बढ़ जाएगी| मुनव्वर राना

  • 3rd Jan 2025

    आप के हँसने से!

    आप के हँसने से ख़तरा और भी बढ़ जाएगा,इस तरह तो और आँखों की नमी बढ़ जाएगी| मुनव्वर राना

  • 3rd Jan 2025

    दुश्मनी बढ़ जाएगी!

    इतनी चाहत से न देखा कीजिए महफ़िल में आप,शहर वालों से हमारी दुश्मनी बढ़ जाएगी| मुनव्वर राना

  • 3rd Jan 2025

    आप के आने से थोड़ी!

    मौत का आना तो तय है मौत आएगी मगर,आप के आने से थोड़ी ज़िंदगी बढ़ जाएगी| मुनव्वर राना

  • 3rd Jan 2025

    रौशनी बढ़ जाएगी!

    मुख़्तसर होते हुए भी ज़िंदगी बढ़ जाएगी,माँ की आँखें चूम लीजे रौशनी बढ़ जाएगी| मुनव्वर राना

  • 3rd Jan 2025

    क़ाफ़िला ख़्वाबों का!

    गर्द-ए-राह की सूरत साँस साँस है ऐ ‘नूर’,मीर-ए-कारवाँ मैं हूँ क़ाफ़िला है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर

  • 3rd Jan 2025

    मयकदा है ख़्वाबों का!

    नश्शे का ये आलम है सच ही सच लगे सब कुछ,ज़िंदगी की सहबा है मय-कदा है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर

  • 3rd Jan 2025

    जीना हो तो मरने से नहीं डरो रे !

    आज मैं शृंगार और ओज दोनो प्रकार की श्रेष्ठतम रचनाएं देने वाले, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी की एक ओजपूर्ण कविता शेयर कर रहा हूँ। दिनकर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर जी की यह कविता – वैराग्य छोड़ बाँहों की विभा…

  • 2nd Jan 2025

    तज़्किरा है ख़्वाबों का!

    अपनी अपनी ताबीरें ढूँढता है हर चेहरा,चेहरा चेहरा पढ़ लीजे तज़्किरा है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर

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