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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th Jan 2025

    अस्ताचल की वीणा!

    आज मैं हिंदी के एक श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय रामनरेश त्रिपाठी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर  की हैं।                        लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामनरेश त्रिपाठी जी की यह कविता – बाजे अस्तोदय की वीणा–क्षण-क्षण गगनांगण में रे।हुआ प्रभात छिप गए तारे,संध्या हुई भानु भी हारे,यह उत्थान…

  • 4th Jan 2025

    ख़ुशबुओं का डेरा है!

    ठहरे ठहरे पानी में गीत सरसराते हैं,भीगे भीगे झोंकों में ख़ुशबुओं का डेरा है| साहिर लुधियानवी

  • 4th Jan 2025

    दोनों वक़्त मिलते हैं !

    दोनों वक़्त मिलते हैं दो दिलों की सूरत से,आसमाँ ने ख़ुश हो कर रंग सा बिखेरा है| साहिर लुधियानवी

  • 4th Jan 2025

    चम्पई अंधेरा है!

    पर्बतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है,सुरमई उजाला है चम्पई अंधेरा है| साहिर लुधियानवी

  • 4th Jan 2025

    छाता बना के रक्खा है!

    कोई बता दे ये सूरज को जा के हम ने भी,शजर को धूप में छाता बना के रक्खा है| मुनव्वर राना

  • 4th Jan 2025

    निशाना बना के रक्खा!

    मैं बच गया तो यक़ीनन ये मो’जिज़ा होगा,सभी ने मुझ को निशाना बना के रक्खा है| मुनव्वर राना

  • 4th Jan 2025

    अमीर-ए-शहर ने!

    किसे किसे अभी सज्दा-गुज़ार होना है,अमीर-ए-शहर ने खाता बना के रक्खा है| मुनव्वर राना

  • 4th Jan 2025

    हीरा बना के रक्खा है!

    तमाम उम्र का हासिल है ये हुनर मेरा,कि मैं ने शीशे को हीरा बना के रक्खा है| मुनव्वर राना

  • 4th Jan 2025

    यहाँ पे कोई बचाने!

    यहाँ पे कोई बचाने तुम्हें न आएगा,समुंदरों ने जज़ीरा बना के रक्खा है| मुनव्वर राना

  • 4th Jan 2025

    लालटेन!

    आज मैं हिंदी के एक श्रेष्ठ कवि श्री राजा खुगशाल जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। खुगशाल जी की रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री राजा खुगशाल जी की यह कविता – अंधेरी रातों मेंइसके उजाले मेंपहाड़े रटते थे हमबैलों के रस्से बटते थे– डूंगर काकाइसके उजाले…

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