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श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-11
मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज ग्यारहवां दिन है, मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा हूँ। जैसा मैंने पहले भी बताया है, हमेशा ‘श्रीकृष्ण शर्मा’ नाम से रचनाएं लिखता रहा, उनका प्रकाशन/ प्रसारण भी…
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कच्ची नींद उचट गई!
मिरी बंद पलकों पे टूट कर कोई फूल रात बिखर गया, मुझे सिसकियों ने जगा दिया मिरी कच्ची नींद उचट गई| बशीर बद्र
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ग़म की रात कट गई!
न कोई ख़ुशी न मलाल है कि सभी का एक सा हाल है, तिरे सुख के दिन भी गुज़र गए मिरी ग़म की रात भी कट गई| बशीर बद्र
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श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-9
मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज नौवां दिन है, जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा हूँ। जैसा मैंने पहले भी बताया है, हमेशा ‘श्रीकृष्ण शर्मा’ नाम से रचनाएं लिखता रहा, उनका प्रकाशन/ प्रसारण भी हमेशा इसी नाम से हुआ,…
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मेरा नाम लिखा गया
मुझे लिखने वाला लिखे भी क्या मुझे पढ़ने वाला पढ़े भी क्या, जहाँ मेरा नाम लिखा गया वहीं रौशनाई उलट गई| बशीर बद्र