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अपना यही अमल है!
चलते हैं बच के शैख़-ओ-बरहमन के साए से, अपना यही अमल है बुरे आदमी के साथ. कैफ़ भोपाली
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कुटिया में कौन आएगा
कुटिया में कौन आएगा इस तीरगी के साथ, अब ये किवाड़ बंद करो ख़ामुशी के साथ. कैफ़ भोपाली
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श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-18
मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज अठारहवां दिन है, इस प्रकार जहाँ इन सबको, जितनी उपलब्ध हैं, एक साथ शेयर कर लूंगा, इसके लिए मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा हूँ। जैसा मैंने पहले…
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दिल आ जाए तो
नादानी और मजबूरी में यारो कुछ तो फ़र्क़ करो, इक बे-बस इंसान करे क्या टूट के दिल आ जाए तो. अंदलीब शादानी
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मेरा ख़्वाब-ए-जवानी
झूट है सब तारीख़ हमेशा अपने को दोहराती है, अच्छा मेरा ख़्वाब-ए-जवानी थोड़ा सा दोहराए तो. अंदलीब शादानी
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चाहत आग लगाए तो
सुनी-सुनाई बात नहीं ये अपने ऊपर बीती है, फूल निकलते हैं शो’लों से चाहत आग लगाए तो. अंदलीब शादानी
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धोके में आ जाए तो
क्यूँ ये मेहर-अंगेज़ तबस्सुम मद्द-ए-नज़र जब कुछ भी नहीं, हाए कोई अंजान अगर इस धोके में आ जाए तो. अंदलीब शादानी
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कोई हमें अपनाए तो
चाहत के बदले में हम तो बेच दें अपनी मर्ज़ी तक, कोई मिले तो दिल का गाहक कोई हमें अपनाए तो. अंदलीब शादानी
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दामन हाथ में आए तो
शफ़क़ धनक महताब घटाएँ तारे नग़्मे बिजली फूल, इस दामन में क्या क्या कुछ है दामन हाथ में आए तो. अंदलीब शादानी