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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 25th Aug 2024

    अक्स-ए-बदन भी है!

    माना कि रंग रंग तिरा पैरहन भी है, पर इस में कुछ करिश्मा-ए-अक्स-ए-बदन भी है| जाँ निसार अख़्तर

  • 25th Aug 2024

    फ़ख़्र करते थे कभी!

    अब उन्हें पहचानते भी शर्म आती है हमें, फ़ख़्र करते थे कभी जिन की मुलाक़ातों पे हम| जाँ निसार अख़्तर

  • 25th Aug 2024

    हँस दिया करते थे!

    ज़ुल्फ़ से छनती हुई उस के बदन की ताबिशें, हँस दिया करते थे अक्सर चाँदनी रातों पे हम| जाँ निसार अख़्तर

  • 25th Aug 2024

    मुफ़्त का इल्ज़ाम!

    कोई भी मौसम हो दिल की आग कम होती नहीं, मुफ़्त का इल्ज़ाम रख देते हैं बरसातों पे हम| जाँ निसार अख़्तर

  • 25th Aug 2024

    अब उन्हीं बातों को!

    अब उन्हीं बातों को सुनते हैं तो आती है हँसी, बे-तरह ईमान ले आए थे जिन बातों पे हम| जाँ निसार अख़्तर

  • 25th Aug 2024

    लाख आवारा सही!

    लाख आवारा सही शहरों के फ़ुटपाथों पे हम, लाश ये किस की लिए फिरते हैं इन हाथों पे हम| जाँ निसार अख़्तर

  • 25th Aug 2024

    चिंता है फकीरों की!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि, समीक्षक तथा बाबा नागार्जुन और फणीश्वर नाथ रेणु जी के संबंध में उल्लेखनीय पुस्तकें लिखने वाले स्वर्गीय भारत यायावर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| यायावर जी की बहुत सी कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं तथा वे फेसबुक पर मेरे मित्र भी…

  • 24th Aug 2024

    वो आँख अभी !

    इक धूप सी है जो ज़ेर-ए-मिज़्गाँ, वो आँख अभी उठी नहीं है| अली सरदार जाफ़री

  • 24th Aug 2024

    हैं काम बहुत अभी!

    हैं काम बहुत अभी कि दुनिया, शाइस्ता-ए-आदमी नहीं है| अली सरदार जाफ़री

  • 24th Aug 2024

    दिल में जो जलाई थी!

    दिल में जो जलाई थी किसी ने, वो शम-ए-तरब बुझी नहीं है| अली सरदार जाफ़री

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