Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 12th Feb 2025

    क्या है मेरी बारी में!

    आज मैं हिंदी गीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। बच्चन जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।                 लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का यह गीत – क्या है मेरी बारी में। जिसे सींचना था मधुजल सेसींचा खारे पानी से,नहीं उपजता…

  • 11th Feb 2025

    दिल का कारोबार!

    इश्क़ में क्या नुक़सान नफ़ा है हम को क्या समझाते हो,हम ने सारी उम्र ही यारो दिल का कारोबार किया| जाँ निसार अख़्तर

  • 11th Feb 2025

    दौरे भी तन्हाई के!

    हम पर कितनी बार पड़े ये दौरे भी तन्हाई के,जो भी हम से मिलने आया मिलने से इंकार किया| जाँ निसार अख़्तर

  • 11th Feb 2025

    आँखों को ख़ूँ-बार!

    क़तरा क़तरा सिर्फ़ हुआ है इश्क़ में अपने दिल का लहू,शक्ल दिखाई तब उस ने जब आँखों को ख़ूँ-बार किया| जाँ निसार अख़्तर

  • 11th Feb 2025

    किसने बीमार किया! जाते जाते कोई हम से अच्छे रहना कह तो गया,पूछे लेकिन पूछने वाले किस ने ये बीमार किया| जाँ निसार अख़्तर

  • 11th Feb 2025

    तेरी सोई आँखों ने तो!

    पहले भी ख़ुश-चश्मों में हम चौकन्ना से रहते थे,तेरी सोई आँखों ने तो और हमें होशियार किया| जाँ निसार अख़्तर

  • 11th Feb 2025

    जितने भी बदनाम हुए!

    मुद्दत हुई उस जान-ए-हया ने हम से ये इक़रार किया,जितने भी बदनाम हुए हम उतना उस ने प्यार किया| जाँ निसार अख़्तर

  • 11th Feb 2025

    फ़ख़्र करते थे कभी!

    अब उन्हें पहचानते भी शर्म आती है हमें,फ़ख़्र करते थे कभी जिन की मुलाक़ातों पे हम| जाँ निसार अख़्तर

  • 11th Feb 2025

    ये है दुबई मरीना!

    दुबई में इस बार हम दुबई मरीना गए, जो समुद्र तट पर मानव निर्मित मरीना (वाटरफ्रंट) है जिसमें ऊंची ऊंची आकर्षक इमारतें हैं, बहुत सुंदर नावें, वाटर स्पोर्ट्स हैं, घूमने के लिए भी यह स्थान अत्यंत सुंदर है। इस इलाके में नगर के सबसे महंगे होटल हैं, सामान्य लोग इस क्षेत्र में रहने की सोच…

  • 10th Feb 2025

    चाँदनी रातों पे हम!

    ज़ुल्फ़ से छनती हुई उस के बदन की ताबिशें,हँस दिया करते थे अक्सर चाँदनी रातों पे हम| जाँ निसार अख़्तर

←Previous Page
1 … 494 495 496 497 498 … 1,529
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,132 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar